प्रिय शान्तिकुमार, १८६. पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको सत्याग्रह आश्रम साबरमती ३० मार्च, १९२८ आप मुझे सारे नये अतिरिक्त तथ्य और आँकड़े अवश्य भेजते रहिये । उस दिन आपने जो संयुक्त पक्का चिट्ठा भेजा है, उसे मैं इस पत्रके साथ भेज रहा हूँ । भी। हृदयसे आपका, अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू० ४७८६) की फोटो नकलसे तथा एस० एन० १३१२५ से सौजन्य : शान्तिकुमार मोरारजी १८७. पत्रः ना० २० मलकानीको सत्याग्रह आश्रम साबरमती ३० मार्च, १९२८ प्रिय मलकानी, तुम्हारा पत्र मिला । तुम्हें अपनी आवश्यकताओं और अन्य किसी भी मामले में मुझे लिखने में बिलकुल संकोच नहीं करना चाहिए। जहाँतक हो सकेगा मैं तुमसे मिलनेकी कोशिश करूँगा, परन्तु तुम्हें मुसीबत बर्दाश्त करनेके लिए तैयार करना चाहिए । गृह कलह भी राष्ट्र सेवकके भाग्यमें बदा हो सकता है । । ठक्कर बापा आपके वेतनके बारेमें सर पुरुषोत्तमदास से मिले थे। आपको केन्द्रीय समितिसे वेतन मिलनेकी बातको सर पुरुषोत्तमदास अत्यन्त स्वाभाविक और रु० १५० बिलकुल ठीक मानते हैं। अब मुझे रु० २०० माँगने पड़ेंगे। मुझे कोई कठिनाई दिखाई नहीं देती है । मैं यह पता लगानेकी कोशिशमें हूँ कि क्या जेठालाल या पर्शतलाल कुछ दिनोंके लिए भेजे जा सकते हैं। कल्याणजी और नरहरि भाईको भेज सकना असम्भव है । नरहरिने अपने लिये कामकी योजना स्वयं बना रखी है । और कल्याणजी बारडोली में अवश्य ही व्यस्त होंगे। परन्तु मेरे पास एक ऐसे योग्य व्यापारी हैं, जो इस वक्त ऐसे Gandhi Heritage Portal
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