पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको १७५ जहाँतक आपके साथ ठहरनेका सम्बन्ध है, यदि आप मुझे और मेरे साथियोंको आश्रय दे सकें, तो निस्सन्देह मैं आपके पास ठहरना चाहूँगा; यदि मैं आया भी तो अकेला नहीं आऊँगा । कु० म्यूरियल लेस्टर हृदयसे आपका, किंगस्ले हॉल पॉविस रोड बो० ई० ३ लन्दन अंग्रेजी (एस० एन० १४९४९) की फोटो - नकलसे । १८९. पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको भाई घनश्यामदासजी, सत्याग्रह आश्रम साबरमती रामनवमी [ ३० मार्च, १९२८] १ आपका पत्र मीला है। यूरोप जानेके बारेमें मैं अब तक कुछ निश्चय नहिं कर सका हूं । जानेका दिल नहीं है। रोमेरोलांको मीलनेकी इच्छा है सही। परंतु इस बारेमें उनके पत्रकी मैं प्रतीक्षा करता हूं। एक पत्र आया है उससे जानेका निश्चय नहि होता है। यदि जानेका हुआ भी तो मेईमें होगा और अक्टोबरमें वापिस आ जाउंगा। थोड़े दिन भी यदि मैं अपके साथ मसूरीमें रह सकता हूं तो प्रयत्न करूंगा । एप्रिल १३ तारीख तक तो यहीं रहना चाहता हूं । विदेसी कपड़ोंके बहिष्कारके बारेमें मीलोंके सहकारके बारेमें मैंने जो कुछ लीखा है उसपर मुझे आपका अभिप्राय भेजें । स्वास्थ्यके पूरे हाल मुझे दे दें। अब कुछ खा सकते हो ? आपका, मोहनदास सी० डब्ल्यू० ६१५५ से । सौजन्य : घनश्यामदास बिड़ला १. पत्र में आये उल्लेखोंसे यह स्पष्ट है कि यह १९२८ में लिखा गया था। २. सत्याग्रह सप्ताहका अन्तिम दिन । ३. देखिर “हमारी मिलें क्या कर सकती है ?", १५-३-१९२८ । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२०७
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