जहाँतक आपके साथ ठहरनेका सम्बन्ध है, यदि आप मुझे और मेरे साथियोंको आश्रय दे सकें, तो निस्सन्देह मैं आपके पास ठहरना चाहूँगा; यदि मैं आया भी तो अकेला नहीं आऊँगा।
हृदयसे आपका,
किंगस्ले हॉल
पॉविस रोड
बो॰ ई॰ ३
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १४९४९) की फोटो–नकलसे।
१८९. पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
रामनवमी [३० मार्च, १९२८][१]
आपका पत्र मीला है। यूरोप जानेके बारेमें मैं अब तक कुछ निश्चय नहिं कर सका हूं। जानेका दिल नहीं है। रोमेरोलांको मीलनेकी इच्छा है सही। परंतु इस बारेमें उनके पत्रकी मैं प्रतीक्षा करता हूँ। एक पत्र आया है उससे जानेका निश्चय नहिं होता है। यदि जानेका हुआ भी तो मेईमें होगा और अक्टोबरमें वापिस आ जाउंगा। थोड़े दिन भी यदि मैं अपके साथ मसूरीमें रह सकता हूं तो प्रयत्न करूंगा। एप्रिल १३ तारीख[२] तक तो यहीं रहना चाहता हूं।
विदेसी कपड़ोंके बहिष्कारके बारेमें मीलोंके सहकारके बारेमें मैंने जो कुछ लीखा[३] है उसपर मुझे आपका अभिप्राय भेजें।
स्वास्थ्यके पूरे हाल मुझे दे दें। अब कुछ खा सकते हो?
आपका,
मोहनदास
सी॰ डब्ल्यू॰ ६१५५ से।
सौजन्य : घनश्यामदास बिड़ला