पत्र : सुभाषचन्द्र बोसको १७९ मेरा अपना अनुभव ऐसा है । मुझे पता लगा है कि रूसमें किसानोंके लिए ऐसे एक हजार स्कूल चलाये जा रहे हैं जहाँ ज्ञानेन्द्रियोंका यथा सम्भव सभी विभिन्न साधनों का प्रयोग करके पुस्तकोंकी सहायता के बिना शिक्षा दी जाती है। उन्होंने अध्यापकों से कहा कि आप अपने घरों और गलियोंकी सफाई स्वयं करें और इसके लिए दूसरों पर निर्भर न रहें । भाषण समाप्त करते हुए महात्माजीने उनसे कहा कि अपने स्कूलोंको आप हर तरहसे आदर्श बनायें, जिससे कि मिल-मालिकोंके लड़के, लड़कियाँ उनसे स्पर्द्धा करने लगे और मिल-मालिक अपने बच्चोंको श्रमिक स्कूलोंमें भेजना चाहें। शिक्षाकी नींव सत्यपर आधारित है और आपको सदैव सत्यका ही सहारा लेना चाहिए। [अंग्रेजीसे ] हिन्दू, ३१-३-१९२८ १९२. पत्र : सुभाषचन्द्र बोसको आश्रम साबरमती ३१ मार्च, १९२८ प्रिय मित्र काफी समय से मैं आपको एक-आध पंक्ति लिखना चाहता रहा हूँ । मुझे बताया गया था कि मैं मद्रासमें आपसे मिलनेकी उम्मीद कर सकता था । परन्तु वैसा नहीं होना था । क्या आप कृपा करके मुझे बतायेंगे कि आपने विदेशी वस्त्र बहिष्कारके बजाय अंग्रेजी वस्तुओंके और मुख्य रूपसे अंग्रेजी वस्त्रके बहिष्कारका नारा क्यों अधिक पसन्द किया है और यह अंग्रेजी वस्त्र बहिष्कारकी बात भी सिर्फ समझौता न होने तक ही क्यों ? आशा है कि आप की सेहत फिर पहले जैसी हो गई होगी । श्रीयुत सुभाषचन्द्र बोस कलकत्ता अंग्रेजी (एस० एन० १३१४३) की फोटो नकलसे । हृदयसे आपका, Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२११
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