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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२१७

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पत्र: उत्तम भिक्खुको १८५ यदि हम विदेशी कपड़ेका बहिष्कार करना चाहते हैं तो इस छोटी-सी दुकानमें रखी हुई खादी तो सप्ताहके एक दिनमें ही बिक सकती है। ऐसी एक दुकानका खर्चा जैसे-तैसे निकालनेकी जरूरत तो होनी ही नहीं चाहिए। [ गुजराती से ] नवजीवन, १-४-१९२८ १९८. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ प्रिय सतीश बाबू, आपका पत्र मिला । निस्सन्देह मिल-मालिक, हमें जो भी चाहिए, खुशीसे दे सकते हैं; बशर्ते कि हम सिर्फ उनके मालका विज्ञापन करना स्वीकार कर लें । परन्तु हम तबतक ऐसा नहीं कर सकते जबतक कि वे हमारी शर्तें स्वीकार नहीं करते । [ उनके साथ ] हाल ही में हुए पत्र-व्यवहारकी नकल आपको दिलचस्प मालूम होगी । कृपया आप इस सारी चीजको पूरी तरह गोपनीय रखियेगा । काश! कि हेमप्रभा देवीको अपनी उदासीनता, जो उनके न चाहनेपर भी अकसर उन्हें घेर लेती है, छोड़ देनेको प्रेरित किया जा सकता । हृदयसे आपका, संलग्न पत्र : २ अंग्रेजी (एस० एन० १३१४४ ) की फोटो - नकलसे । प्रिय मित्र, १९९. पत्र: उत्तम भिक्खुको सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ आपका पत्र मिला; पत्र लिखनेके लिए मेरा धन्यवाद स्वीकार करें। मुझे सचमुच खेद है कि मेरी बर्माकी प्रस्तावित यात्राके सम्बन्धमें किसी व्यक्तिने आपसे ऐसी कोई बात कही ही क्यों। अगर मैं बर्मा आया तो भी मैं बर्मा-निवासियोंसे किसी सहायताकी आशा नहीं करता हूँ । यदि मैं आया तो जबतक मैं वहाँकी राजनीतिक Gandhi Heritage Portal