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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२१८

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१८६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय स्थितिका अध्ययन न कर लूं और उसपर विश्वासपूर्वक न बोल सकूं, तबतक उसके सम्बन्धमें अपने विचार प्रकट करनेमें निश्चय ही झिझकूंगा । रेवरेण्ड उत्तम भिक्खु स्वेजदी क्यांग क्याब अंग्रेजी (एस० एन० १३१४५) की फोटो - नकलसे । २००. पत्र : जवाहरलाल नेहरूको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ प्रिय जवाहर, तुम्हारा पत्र मिला । संलग्न प्रतियोंसे तुम्हें पता चल जायेगा कि मिल मालिकोंसे होनेवाली बातचीत में क्या प्रगति हो रही है। बहरहाल मैं तुमसे सहमत हूँ कि इसका फिलहाल कोई नतीजा नहीं निकलेगा । परन्तु वक्त आने पर बातचीतका फल निकल सकता है। एक समय ऐसा था जब कि मिल-मालिक बहिष्कार प्रचारका पूरी तरहसे विरोध कर रहे थे। मैं तुम्हें इस बातचीतकी समाप्तिपर लिखूंगा । यद्यपि रोमाँ रोलांका पहला अपेक्षित पत्र आ गया है और वह मेरी प्रस्तावित यात्राकी स्नेहसे प्रतीक्षा कर रहे हैं, परन्तु इससे मुझे निर्णय पर पहुँचने में मदद नहीं मिली है । जैसे-जैसे निश्चित निर्णय लेनेका वक्त नजदीक आता जा रहा है, मेरा असमंजस बढ़ रहा है। हो सकता है कि अगले सप्ताह रोमाँ रोलाँका समुद्री तार आये और उससे मेरे भाग्यका निर्णय हो । फिलहाल सिंगापुर जानेकी कोई बात नहीं है। फिलहाल अभी तो मैं यहीं काममें बँधा हुआ हूँ । यदि मैं यूरोप नहीं जाता, तो मेरा बर्मा जाना निश्चित है । मैं दो महीने वहाँ रहूँगा, पहाड़ी इलाकोंमें जाऊँगा और वहाँ निवासके दौरान चन्दा इकट्ठा करूँगा । मैं तुमसे पूरी तरह सहमत हूँ कि हमें किसी दिन अमीर लोगों और मुखर शिक्षित वर्गको अलग रखकर तीव्र आन्दोलन आरम्भ करना होगा। परन्तु वह समय अमी नहीं आया है । तुमने मुझे यह नहीं बताया कि कमला गर्मीके महीने कहाँ गुजारेगी। हृदयसे तुम्हारा, अंग्रेजी (एस० एन० १३१४७) की फोटो नकलसे । Gandhi Heritage Portal