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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२१९

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प्रिय मित्र, २०१. पत्र : एच० एम० अहमदको सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ आपका पत्र मिला। मैं इसे एक मित्र के पास भेज रहा हूँ जो आपके प्रश्नोंका उत्तर मेरी अपेक्षा ज्यादा अच्छी तरहसे दे सकते हैं; मैंने उन्हें सीधा आपको लिखनेके लिए कह दिया है । एच० एम० अहमद महोदय सेयूमान्स्ट्रासे १७ बर्लिन एन० डब्ल्यू ० ६ अंग्रेजी (एस० एन० १४२७६ ) से । हृदयसे आपका, प्रिय शुएब, २०२. पत्र : शुएब कुरेशीको सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ तुम कभी पत्र नहीं लिखते और मैं भी ले-देकर तुम्हारी इस बुरी मिसालकी ही नकल करता हूँ । इस अप्रिय आचरणको भंग करनेका एक अवसर अपने आप आ गया है । मैं इस पत्रके साथ एक पत्र नत्थी कर रहा हूँ । तुम इन दो प्रश्नोंका उत्तर मेरी अपेक्षा ज्यादा अच्छी तरह दे सकते हो। मैंने अहमदको लिख दिया है कि मैंने वह पत्र तुम्हारे पास भेज दिया है। इसलिए उनके दोनों प्रश्नोंका उत्तर जितना संक्षेपमें दे सको दे देना । तुम क्या कर रहे हो ? तुम्हें कैसा लग रहा है ? मुझे तुमसे बड़ी-बड़ी उम्मीदें हैं । हृदयसे तुम्हारा, अंग्रेजी (एस० एन० १३१४८) की फोटो नकलसे । १. देखिए भगला शीर्षक। Gandhi Heritage Portal