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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२२०

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प्रिय सदाशिवम्, २०३. पत्र : सदाशिवम्को सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ कलकत्ताके श्रीयुत जीवनलालजीको विश्राम और जलवायु परिवर्तनकी जरूरत है । उन्हें बंगलोर जानेकी सलाह दी गई है। क्या आप कृपया एक छोटा-सा बंगला या मकान [ उनके लिए] महीनेके हिसाब से ले लेंगे ? इसमें रोशनीका अच्छा प्रबन्ध होना चाहिए। यह काफी हवादार और खुला होना चाहिए। यह जितना एकान्त में हो उतना ही अच्छा है, क्योंकि पुनः स्वास्थ्य लाभके लिए एकान्त चाहिए । आसपास की जगह सफाई की दृष्टिसे सर्वथा निर्दोष और अच्छी होनी चाहिए यदि [महीना ] समाप्त होनेसे पहले ऐसा बंगला मिल जाये तो मैं चाहता हूँ कि आप मुझे उसकी स्थिति और किराया बताते हुए तार कर दें। मैं चाहूँगा कि आप इस मामले पर जल्दी ध्यान दें । श्रीयुत जमनालालजीकी पेढ़ीकी मद्रासमें एक शाखा है। मुमकिन है मद्रासका उनका एजेंट इस बारे में आपसे मिले । तब आप कृपया उसकी सहायता कर दें । अंग्रेजी (एस० एन० १३१४९ ) की माइक्रोफिल्म से । प्रिय चार्ली, २०४. पत्र : सी० एफ० एन्ड्रयूजको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ मुझे तुम्हारे पत्र नियमित रूपसे मिलते रहे हैं। परन्तु मुझे तुम्हें लिखनेका समय कभी नहीं मिल पाता। मुझे तुम्हारा तार भी मिला है। रोलाँका अपेक्षित पत्र मिल गया है । ऐसा लगता है कि मेरे वहां जानेका विचार उन्हें पसन्द है, और वे पहलेसे ही मुझे निमन्त्रण देनेके लिए संस्थाओंको प्रेरित कर रहे हैं। परन्तु जैसे- जैसे निर्णय करनेका समय नजदीक आता जा रहा है, मैं अधिकाधिक असमंजसमें पड़ता जा रहा हूँ । अन्तिम निर्णय पर पहुँचनेसे पहले मैं अब भी उनके अपेक्षित समुद्री तारकी प्रतीक्षामें हूँ । Gandhi Heritage Portal