पत्र : रामजीदास जैनीको १८९ श्री मुकुल डे यहाँ हैं, आते ही उन्होंने तुरन्त अपना काम शुरू कर दिया । मैं अभी अम्बालालसे बात नहीं कर सका हूँ । लेकिन मैं बात करूँगा जरूर। मुझे आशा है कि रतिकी पत्नीकी बीमारी तपेदिककी नहीं है। क्या तुम गुरुदेवको यूरोपमें काफी समय तक विश्राम करनेके लिए राजी नहीं कर सकते ? उनपर इतनी जल्दी बुढ़ापा आ जाये, इसका कोई कारण नहीं है । अंग्रेजी (एस० एन० १३१५०) की फोटो - नकलसे । २०५. पत्र : रामजीदास जैनीको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ प्रिय मित्र, आपका पत्र मिला । मुझे लगता है कि शायद आश्रम दूर होनेके कारण ही सुहावना लगता है । मैं सोचता हूँ कि क्या आप इस उम्र में, जब कि आप विशेष रहन- सहनके आदी हो चुके हैं, अपने अपेक्षाकृत सुविधामय जीवनको आश्रमके कठिन जीवनके अनुकूल बदल सकेंगे या नहीं। फिर भी यदि आप आश्रम में रहने के अत्यन्त इच्छुक हैं, तो आप सबसे पहले आश्रमके संविधानका अध्ययन करें और तब कुछ दिन यहाँ आकर रहें और यहाँका जीवन स्वयं देखें । मुझे खेद है कि इस वक्त मेरे पास संविधानकी कोई प्रति नहीं है । परन्तु यह संविधान, नटेसन प्रकाशनसे निकले मेरे भाषणों और लेखोंके संग्रहमें उद्धृत है । संविधान में परिवर्तन हुए हैं, परन्तु वे कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हैं । आप इसमें देखेंगे कि आश्रमवासियोंके लिए ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है । राय साहब रामजीदास जैनी डाकखाना मजीठा, जिला अमृतसर अंग्रेजी (एस० एन० १३१३८ - ए० ) की माइक्रोफिल्मसे । हृदयसे आपका, Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२२१
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