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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२२२

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२०६. पत्र : रेमिंगटन टाइपराइटर कम्पनी बम्बईको प्रिय महोदय, सत्याग्रह आश्रम साबरमती १ अप्रैल, १९२८ आपके पास मामूली-सी मरम्मत और सुधारके लिए ६१६२५ नम्बरका जो सफरी रेमिंगटन टाइपराइटर मैंने भेजा था, वापस मिल गया है। मुझे यह कहते हुए अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है कि मशीन ठीक चल रही है और उससे मुझे पूरा सन्तोष है । सधन्यवाद, अंग्रेजी (एस० एन० १३१४६) की माइकोफिल्मसे । २०७. पत्र : सत्यानन्दको आपका विश्वस्त, सत्याग्रह आश्रम साबरमती ३ अप्रैल, १९२८ प्रिय सत्यानन्द बाबू, आपका पत्र मिला । मुझे यह सोचकर हर्ष होता है कि आप मुझे कभी-कभी याद जरूर कर लेते हैं । आपने 'यंग इंडिया' के पृष्ठोंमें देखा होगा कि मैं मिल- मालिकोंको विदेशी वस्त्र बहिष्कार सफल बनानेका बोझ अपने कन्धोंपर लेने के लिए प्रोत्साहित करनेका भरसक प्रयत्न कर रहा हूँ। हो सकता है कि फिलहाल हम समझौता वार्त्तासे ज्यादा कुछ न कर सकें। यदि फिलहाल हम कुछ न कर सकें तो भी इससे मावी कार्यवाहीके लिए रास्ता साफ हो जायेगा । यूरोप जानेके औचित्यके बारेमें में स्वयं अपने मनमें पूरी तरह आश्वस्त नहीं हूँ । इसलिए मैं अब भी उस विचारको अपने आप अंकुरने दे रहा हूँ, और अब मी अन्तरात्माकी आवाजकी प्रतीक्षामें हूँ। मुमकिन है कि अगले पखवाड़ेमें इस मामलेका फैसला हो जाये । बहरहाल अगर समझौता वार्ताको कोई मूर्त रूप दे दिया जाये तो निस्सन्देह मैं नहीं जाऊँगा; क्योंकि तब मैं इस विश्वाससे अपने मनको समझा सकता हूँ कि बहिष्कारको सफलतासे चलानेके लिए भारतमें मेरी लगातार उपस्थिति अनिवार्य होगी । आपका, अंग्रेजी (एस० एन० १३१५५ ) की फोटो नकलसे । Gandhi Heritage Portal