चि० रामी, २०८. पत्र : रामी गांधीको सत्याग्रह आश्रम साबरमती ३ अप्रैल, १९२८ इस बार तुम्हारे अक्षर सुन्दर नहीं तुम्हारा पत्र मिला । कहे जा सकते । पंक्तियाँ टेढ़ी हैं। कुसुमका स्वास्थ्य सुधरना चाहिए। राष्ट्रीय सप्ताहमें खादी के लिए विशेष कामका प्रयत्न करना । बापूके आशीर्वाद गुजराती (एस० एन० ९७०७) की फोटो - नकलसे । २०९. पत्र : ना० र० मलकानीको आश्रम साबरमती ४ अप्रैल, १९२८ प्रिय मलकानी, तुम्हारा तार मिला। मैं जयसुखलाल गांधीको नहीं लेकिन मथुरादासको, जो यह पत्र ला रहे हैं, भेज रहा हूँ । सम्भवतः वे इस कामके लिए ज्यादा उपयुक्त हैं, क्योंकि उनका अंग्रेजीका ज्ञान ज्यादा अच्छा है और कच्छ-निवासी होनेके कारण वह वहाँके बहुत से लोगोंकी भाषा और आदतोंको जानते हैं । निस्सन्देह वह मंजे हुए कार्यकर्त्ता हैं । वह इधर कई सालोंसे खादीका काम करते आ रहे हैं और उन्हें कपड़ेके व्यापारका विस्तृत ज्ञान है। उनका जन्म और पालन-पोषण मलाबारमें हुआ है । वास्तवमें वह लक्ष्मीदासके साथ आये थे । अभी-अभी उन्हें विद्यापीठमें चरखेका काम बढ़ानेके लिए काका साहबने ले लिया है। इसलिए वह तुम्हें विद्यापीठसे कुछ समयके लिए दिये जा रहे हैं। उनका मानदेय विद्यापीठसे दिया जायेगा। फिलहाल उनकी यात्राका खर्च तुम्हारे खाते में से अर्थात् समितिके खातेसे दिया जा रहा है । परन्तु यदि रेल यात्राके खर्चेकी अदायगीमें कोई कठिनाई हो, तो तुम मुझे बताना । मैं ऐसा मानता हूँ कि तुम उन्हें १५ मईके बाद नहीं रखना चाहोगे। यदि उसके बाद भी तुम्हें किसी व्यक्तिकी जरूरत हो, तो मुझे कोई दूसरा आदमी भेजना पड़ेगा, क्योंकि Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२२३
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