सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२३१

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

२१६. अ० भा० चरखा संघको वार्षिक रिपोर्ट अ० भा० चरखा संघकी अपनी दूसरी सालाना रिपोर्ट प्रकाशित हो गई है । यह रिपोर्ट बिलकुल व्यावहारिक और शिक्षाप्रद है। रिपोर्ट ३१ अठपेजी पृष्ठोंमें छापी गई है और परिशिष्ट २४ पृष्ठोंमें है । मैं तो पाठकोंसे यही कहूँगा कि पहले वे परिशिष्ट ही पढ़ जायें। उनसे संघकी आमदनी और खर्चका ब्यौरेवार और जाँचनेपर सही प्रमाणित किया गया हिसाब मिल जायेगा । पाठकको एक नजरमें ही मालूम हो जायेगा कि किस तरह २० लाख रुपयोंकी पूँजी एक सर्वाधिक विस्तृत और इसलिए सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्योगमें लगी है। अगर पाठक इन आंकड़ोंको ध्यानपूर्वक पढ़ें तो वे अपनी आमदनीका एक अंश इस व्यवसायमें लगानेका महत्व समझ सकेंगे और इससे जो लाभ होगा, वह उन गरीब गाँववालोंकी समृद्धिके रूपमें होगा जिनके श्रमपर उनकी अपनी आमदनी निर्भर है। परिशिष्टोंमें अ० भा० चरखा संघके प्रस्ताव भी दिये गये हैं, जिनमें बतलाया गया है कि संघकी सामान्य नीति क्या है, किन शर्तोंपर संघ किसीको कर्ज देता है, किन बातोंपर संघके डिपोको माल उधार दे सकते हैं, किस तरह खद्दरके स्वतन्त्र व्यापारियोंको सहायता दी जाती है तथा खद्दरकी फेरी करनेवालोंको क्या कमीशन मिलता है । इसके अलावा परिशिष्टोंमें संघका विधान भिन्न-भिन्न एजेन्सियों या शाखाओंका परिचय और पता, और दूसरी जानने लायक बातें दी हुई हैं । परिशिष्ट देख चुकनेके बाद अगर पाठकके पास घंटा, आधा घंटा समय हो तो, वह रिपोर्ट पढ़े। रिपोर्टसे पता चलेगा कि खादीने कितनी प्रगति की है । उसीसे अ० भा० देशबन्धु स्मारक कोषकी हालतके बारेमें भी पता चलेगा। जब कि सन् १९२५-२६ में कुल रु० २३,७६,६७० की खादी बनी थी सन् १९२६-२७ में कुल रु० २४,०६,३७० की बनी और उसी समयमें बिक्री भी क्रमशः रु० २८,९९,१४३ और रु० ३३,४८,७९४ की हुई । खादी कोषमें धन देनेवालोंको इन आँकड़ोंसे यह सन्तोष हो जायेगा कि खादीका काम घाटेमें नहीं चल रहा है, बल्कि काफी अच्छी तरहसे प्रगति कर रहा है। पिछली रिपोर्टके अनुसार कतैयोंकी संख्या ५०,००० थी, इस सालकी रिपोर्टमें उनकी संख्या बढ़कर, ८३,३३९ हो गई है, और इनसे ५,१९३ बुनकरोंको काम मिल रहा है । संघकी शाखाओंके जरिये पिछले साल १,५०० गाँवोंमें हाथ - कताईका काम हो रहा था। अब इस साल, २,३८१ गाँवोंमें हो रहा है । जैसे कि पिछली बार भी रिपोर्टमें कतैयों और गाँवोंकी संख्या कम ही बतलाई गई थी, उसी तरहसे इस बार भी कम ही बतलाई गई है । खादीके १७७ उत्पादन केन्द्र हैं, जिनमें ६२ संघके, ४१ संघसे सहायता प्राप्त और ७४ स्वतन्त्र हैं । २०४ [बिक्री] केन्द्र हैं, जिनमें ११५ संघके, ४४ सहायता प्राप्त और ४५ स्वतन्त्र हैं । संघके तथा सहायता प्राप्त संस्थाओंके अधीन कुल मिलाकर ७४८ कार्यकर्ता हैं। इनमें स्वतन्त्र संस्थाओंमें Gandhi Heritage Portal