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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२३२

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२०० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय काम करनेवालोंकी संख्या शामिल नहीं की गई है। सूतकी किस्म सुधारनेके बारेमें रिपोर्टमें लिखा है : यह भी सन्तोषकी बात है कि कपड़ेकी किस्ममें सुधार होनेके साथ-साथ दर बराबर घटती ही गई है। खादीकी विशेष सेवाके बारेमें तकनीकी विभागकी दी हुई निम्न जानकारी भी रोचक होगी : रिपोर्टके और दूसरे मनोरंजक अंशोंको मुझे छोड़ ही देना पड़ेगा। मैं समझता हूं कि मैंने इतनी बातोंसे रिपोर्ट मँगानेकी इच्छा पाठकोंके दिलोंमें जगा दी होगी, जो अ० भा० चरखा संघ, मिर्जापुर, अहमदाबाद से ४ आनेके डाक टिकट भेजने पर मिल सकती है। [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ५-४-१९२८ २१७. श्री शास्त्रीका आत्म-त्याग परम माननीय श्रीनिवास शास्त्रीने निश्चित अवधिसे अधिक समय दक्षिण आफ्रिकामें ठहरनेका जो निर्णय किया है उससे वहाँके भारतीय प्रवासियोंके हृदय प्रफुल्लित हो उठेंगे। उससे भारत के दक्षिण आफ्रिकी प्रश्नमें दिलचस्पी रखनेवाले और उस उप-महाद्वीपके घटना क्रमका चिन्तापूर्वक अध्ययन करनेवाले लोगोंको भी प्रसन्नता हुई है और उनकी बेचैनी कम हुई है। यूरोपीय श्री शास्त्रीको घनिष्ठ रूपसे जाननेपर उनके प्रति उदासीन अथवा निरुत्साह नहीं हुए हैं, बल्कि वे भारतीय एजेंट जनरलको अपना मित्र और परस्पर मेल-मिलाप करानेवाला मानने लगे हैं । श्री शास्त्री सामान्य औपचारिकताओंका भी ध्यान रखनेवाले नितान्त निष्पक्ष व्यक्ति हैं और जहाँ दृढ़ताकी आवश्यकता होती है वे वहाँ दृढ़ता दिखाते हैं। इससे गोरे लोगों के मनमें उनके प्रति विश्वास और आदरका भाव उत्पन्न हो गया है । कृतज्ञ भारतीयोंने अपने इस असाधारण देशवासीकी योग्यता जल्दी ही जान और समझ ली थी और इसीलिए वे उनसे अनुरोध कर रहे थे कि वे किसी तरह यदि हो सके तो दक्षिण आफ्रिकामें अपनी अवधिसे अधिक रह जायें। अब उन्हें संगठित होकर और अपनी ओरसे समझौतेका पूरी तरहसे ठीक-ठीक पालन करके उनके प्रति अपना प्रेम और आदर व्यक्त करना चाहिए। मैं श्री शास्त्रीको उनके इस त्यागपर बधाई देता हूँ, क्योंकि मैं जानता हूँ कि वे अपनी अवधि समाप्त होने पर स्वदेश लौटनेके लिए कितने व्यग्र थे । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ५-४-१९२८ १. यहाँ नहीं दी जा रही है। २. यहाँ नहीं दी जा रही है। Gandhi Heritage Portal