टिप्पणियाँ २०३ इन दुःखद आँकड़ोंका एक सुखद पहलू भी है। इन आंकड़ोंने मेरे जैसे आशावादी और खद्दर शास्त्रके ज्ञाताकी भी आँखें खोल दी हैं कि खद्दर इतना अधिक लोकप्रिय हो गया है। ये आँकड़े यह दिखलाते हैं कि इतने अधिक आदमियोंने, जिनका हमें पता भी नहीं है और जो पहले महीन कपड़े पहनते थे, उसे राष्ट्रकी पुकार पर छोड़कर मोटा कपड़ा पहनना और खरीदना पसन्द किया है। इसमें तो कोई शक ही नहीं कि उन्होंने अकसर पहलेसे अधिक दाम दिये हैं। उन्होंने अधिकांशतः मिलकी खादी इसी गलत विश्वाससे खरीदी है कि वही सच्ची खादी है और कांग्रेस उसीका समर्थन करती है । जनताका हित चाहनेवाले इन आंकड़ों और उनसे निकाले गये मेरे उचित निष्कर्षोसे बहुत कुछ सोचनेका मसाला और उतना ही आशा करनेका मी कारण मिल जाता है। मेरे यूरोप जानेकी एक सम्भावना है; लेकिन पत्र - लेखक निश्चिन्त रहें कि अगर बहिष्कारकी कोई प्रभावशाली योजना निकट भविष्यमें बन सकी, तो मैं यूरोप नहीं जाऊँगा । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ५-४-१९२८ २१९. टिप्पणियाँ आफ्रिकाबासी और हिन्दुस्तानी दीनबन्धु एन्ड्रयूज जब हालमें यहाँ थे उन्होंने समाचारपत्रोंमें प्रकाशित कवि ठाकुरके एक लेखकी ओर मेरा ध्यान आकर्षित किया था, जो ट्रान्सवालमें कुछ हिन्दुस्तानियों द्वारा अपने आपको मूल आफ्रिका निवासियोंसे अलग रखनेके लिए चलाये जा रहे आन्दोलनके सिलसिलेमें लिखा गया था । मुझसे उन्होंने उसपर अपनी राय देने को भी कहा। मैं नहीं समझता कि इस आन्दोलनको कोई ऐसा महत्व देना चाहिए। क्योंकि मुझे लगता है कि इस आन्दोलनका कोई आधार ही नहीं है । हिन्दुस्तानियों और आफ्रिका निवासियोंमें इतनी ज्यादा बातोंमें समानता है कि वे आफ्रिकी लोगोंसे अलग रहनेका विचार कर ही नहीं सकते । आफ्रिकी लोगोंकी सक्रिय सहानुभूति और मित्रताके बिना दक्षिण आफ्रिकामें हिन्दुस्तानी रह ही नहीं सकते। मैं नहीं समझता कि हिन्दुस्तानियोंने कभी अपने आफ्रिकी भाइयोंके प्रति बड़प्पनका भाव रखा हो । अगर दक्षिण आफ्रिकामें बसे हुए आम हिन्दुस्तानियोंमें इस तरहका कोई आन्दोलन जोर पकड़े तो यह बहुत दुःखद बात होगी। यह कहनेकी तो जरूरत ही नहीं है कि कवि ठाकुरने इस आन्दोलनकी निन्दा करते हुए जो विरोधी राय व्यक्त की है उससे मैं पूरी तरह सहमत हूँ। कहा जाता है कि इस तथाकथित आन्दोलनके नेताओंका कहना है कि 'हमारे एजेंट जनरल (शास्त्रीजी ) हमें जो इतने नीचे स्तरपर ला रहे हैं, वह भारतीय भावना, राष्ट्रीय सम्मान और सभ्यताके लिए हीनताकी बात है ।' अगर यह सच हो तो हमारे प्रति दक्षिण आफ्रिकाके गोरों द्वारा ऐसे ही विचार Gandhi Heritage Portal
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