२०४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय व्यक्त करनेपर हम उनका खण्डन कर सकने योग्य नहीं रह जायेंगे। इससे भी बड़ी बात तो यह है कि दक्षिण आफ्रिकाके गोरे अपनी नफरत और पक्षपातको कार्य- रूपमें परिणत कर सकते हैं, जब कि दक्षिण आफ्रिकी लोगोंके प्रति हमारे ये विचार हमारे लिये ही प्रतिकूल पड़ेंगे । स्त्रियाँ और गहने तमिलनाडसे एक महिला डाक्टरने मुझे एक पत्र तथा साथमें उल्लेखसहित (गह्नोंका) उपहार भेजा है। चूंकि मेरी रायमें उपहारके साथके पत्रसे भेंटका महत्व बढ़ जाता है और वह पत्र चूँकि दूसरोंके लिए उदाहरणका काम करेगा, इसलिए उपहार देनेवाले, सम्बन्धित राजा और स्थानका नाम दिये बिना मैं पत्रका सारांश नीचे देता हूँ :
मैं ये चन्द पंक्तियाँ आपको सिर्फ यह बतानेके लिए लिख रही हूँ कि कल मैंने आपकी सेवामें एक जोड़ी कानकी बालियाँ और हीरेकी जो एक अँगूठी भेजी थी, सो मुझे १२ वर्ष हुए राजमहलमें महाराजासाहबके उत्तराधिकारीके जन्मके अवसरपर की गई सेवाके स्मृति-चिह्नके रूपमें मिली थीं। जब मुझे यह मालूम हुआ कि आपके यहाँसे गुजरते समय महाराजा साहबने सरकारके डरसे आपको अपने यहाँ निमन्त्रण तक देनेका साहस नहीं किया, तो मुझे बहुत दु:ख हुआ । आप कल्पना कर सकते हैं कि पहले जो गहने मेरे साथ ही रहते थे, उन्हें इस तरह आपके चले जानेके बाद पास देखकर मेरे मनमें क्या भावनाएँ उठी होंगी। तब उन्हें देखकर मेरे दिलमें कड़वाहट भर गईं, फिर उन भूखे करोड़ों लोगोंके प्रति गहरी सहानुभूति होने लगी, जिनके बारेमें आपने अपने भाषण में यहाँपर चर्चाकी थी। मैंने मन ही मन कहा, क्या ये गहने लोगोंके ही धनसे नहीं बने हैं? तब उन्हें अपने मानकर रखे रहने का मुझे क्या अधिकार है ? " और ऐसा सोचकर मैंने उन्हें आपके पास भेज देनेका निश्चय किया है। खादी कार्यके लिए आप उनका इस्तेमाल कर सकते हैं। और इस तरह करोड़ों भूखों मरनेवालोंमें से कुछकी मदद कर सकते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे सन्दूकके एक कोने में पड़े रहनेकी बनिस्बत उनका यह ज्यादा अच्छा उपयोग है। एक मित्रने उनकी कीमत ५०० रु० आँकी है । इसलिए ५०० रु० के लिए उनका बीमा कराया गया है । मैं आशा करती हूँ कि कोई उदार सज्जन, उस परिस्थितिको समझकर, जिसमें कि ये गहने आपके पास भेजे जा रहे हैं, आपको उनकी असली कीमतसे अधिक देंगे । आप इस पत्रका जो भी उपयोग करना चाहें, कर सकते हैं । यह भी अचरजकी बात है कि भयका कोई कारण न होते हुए भी हम किस तरह भयकी कल्पना कर लिया करते हैं। कितने राजाओं, महाराजाओंने खुल्लमखुल्ला और खुशीसे खादीका और उसकी मार्फत जैसा कि पत्र लेखिकाने भी लिखा है और ठीक लिखा है, उन गरीबोंके हितका समर्थन किया है, जिनसे उन्हें आखिरकार Gandhi Heritage Portal