२२१. पत्र : जवाहरलाल नेहरूको आश्रम प्रिय जवाहर, साबरमती ५ अप्रैल, १९२८ तुम मिलोंपर मेरा लेख' 'यंग इंडिया' के इसी अंकमें देखोगे | नवीनतम कदम यह उठाया जा रहा है कि वे हमारा जिक्र किये बिना अपने बलबूते पर 'स्वदेशी लीग' चलायेंगे । यह मत सोचना कि मेरी कोशिशसे कुछ ठोस नतीजा निकलने जा रहा है । वे अपनी योजनाएँ अवश्य चलायें । जहाँतक मैं समझता हूँ हमें अपना ध्यान खादीको फेरी लगाकर बेचने तक सीमित रखना चाहिए । यूरोपकी यात्राके बारेमें अभीतक कोई अन्तिम निर्णय नहीं हुआ है। मैं इससे जी चुरा रहा हूँ, और निर्णयके लिए रोमां रोलांकी ओरसे आनेवाले अगले संकेत पर, जो अगले सप्ताह मुझे मिल जाना चाहिए, निर्भर हूँ । अंग्रेजी (एस० एन० १३१६२ ) की फोटो - नकलसे । २२२. पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको हृदयसे तुम्हारा, प्रिय शान्तिकुमार, आश्रम साबरमती ५ अप्रैल, १९२८ आपका पत्र मिला। आगे क्या होता है मैं इसके लिए रुकूंगा । अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू० ४७८८ ) से । सौजन्य : शान्तिकुमार मोरारजी १. देखिए “ बहिष्कारपर एक मिल-मालिक ", ५-४-१९२८ । हृदयसे आपका, बापू Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२३९
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