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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२४०

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२२३. पत्र : बहरामजी खम्भाताको

आश्रम
साबरमती
६ अप्रैल, १९२८

प्रिय खम्भाता,

अदनसे आपका रेडियो–सन्देश मिला। जब मैंने उत्तर दिया, मुझे मालूम नहीं था कि यह रेडियो–सन्देश है। इसलिए मैंने आपके बम्बईके पतेपर तार[] भेजा। श्री कापड़ियाने तार प्राप्त किया और इसकी प्राप्ति स्वीकृति भेजी। आशा है कि जालने[] समुद्री यात्रा आरामसे की होगी और उसे और आप सबको इससे लाभ हुआ होगा।

मैं आपको आस्ट्रिया निवासी ऐसे मित्रोंके लिए पत्र[] भेज रहा हूँ जो यदि आप वियानामें ऑपरेशन करवाना चाहेंगे तो डाक्टरके चुनाव में आपका निर्देशन करेंगे।

ईश्वर सबको सुखी रखे। आप सबको स्नेह,

हृदयसे आपका,

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३१६७) की फोटो–नकलसे।

२२४. पत्र : डा॰ और श्रीमती स्टेंडेनथको

आश्रम
साबरमती
६ अप्रैल, १९२८

प्रिय मित्र,

पत्र–वाहक श्री खम्भाता मेरे प्रिय मित्र और सहयोगी हैं। वे डाक्टरकी सलाह पर अपने इकलौते बेटेकी रोग–परीक्षा करवाने और यदि आवश्यक हो तो ऑपरेशन करवानेके लिए यूरोप गये हैं। मुझे विश्वास है कि आप अच्छे सर्जनके चुनाव आदि में उनकी पूरी सहायता और पथ–प्रदर्शन करेंगे।

हृदयसे आपका,

डा॰ और श्रीमती स्टेंडेनथ

ग्राज (स्टीरियामें)
ट्राउट मान्स्डोर्फगास्स — १

(आस्ट्रिया)

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १४२८१) की फोटो–नकलसे।

  1. यह उपलब्ध नहीं है।
  2. बहरामजी खम्बाताका पुत्र, देखिए अगला शीर्षक।
  3. देखिए अगला शीर्षक।