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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२४३

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२२८ पत्र : गंगारामको आश्रम प्रिय मित्र, साबरमती ६ अप्रैल, १९२८ आप देखेंगे कि मैंने फिर बाघात राज्यके कोलियोंके विषयपर लिखा है । यह बहुत दुःखद बात है । जब मुझे आपका पहला पत्र मिला, मुझे कतई खयाल नहीं था कि पत्र - लेखक मेरे पुराने मित्र राय साहब हैं। इसलिए जब मुझे इस बातका पता चला, तो मुझे प्रसन्नता हुई । यह दीवान कौन हैं और बाघात राज्यकी स्थिति कैसी है? इसकी आबादी कितनी है ? क्या वहाँका जनमत जागृत है ? राज्यमें कैसे पहुँचा जा सकता है ? क्या कोलियोंने डरके मारे जनेऊ छोड़ दिया है ? लाला गंगाराम आर्य फार्म दिल्ली अंग्रेजी (एस० एन० १३१६५) की फोटो - नकलसे । २२९. पत्र : एस० राधाकृष्णनको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती ६ अप्रैल, १९२८ प्रिय मित्र, आपके कृपापूर्ण पत्रके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ । अभीतक यूरोपकी यात्राके सम्बन्धमें कुछ निश्चित नहीं है । मेरे लिये कोई निर्णय कर सकना कठिन है । आप जो लेख चाहते हैं उसके सम्बन्ध में मैं आपसे कहूँगा कि आप मुझपर दया करें। मैं इतना अधिक व्यस्त रहता हूँ और मुझे 'यंग इंडिया' तथा 'नवजीवन' के १, देखिए “ बाघात रियासत और जनेऊ " ५-४-१९२८ । Gandhi Heritage Portal