लिए इतना अधिक समय देना पड़ता है कि कुछ और लिख सकनेके लिए मेरे पास बिलकुल वक्त नहीं रहता।
हृदयसे आपका,
४९ – आई॰ सी॰ हरीश मुकर्जी रोड
भवानीपुर
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३१६६) की फोटो–नकलसे।
२३०. पत्र : जे॰ बी॰ पेनिंगटनको
आश्रम
साबरमती
६ अप्रैल, १९२८
आपके दो पत्र मिले; मैं इनके लिए आपको धन्यवाद देता हूँ। मैं इतना व्यस्त रहा हूँ कि आपकी पुस्तक समाप्त नहीं कर सका हूँ।
यदि आप समझते हैं कि 'यंग इंडिया' में प्रकाशित मेरे लेखों और कु॰ मेयोकी पुस्तकमें कोई अन्तर नहीं है, तो जहाँ तक कु॰ मेयोके कार्यका सम्बन्ध है, मेरे लिये कोई और दलील पेश करना बाकी नहीं बचा है। यदि आपके भारतके अनुभव कु॰ मेयोके अनुभवोंसे मिलते–जुलते हैं, तो सम्भवतः किसी भी दलीलसे आपको उसके विपरीत विश्वास नहीं हो सकता।
हृदयसे आपका,
५, एवेल पार्क गार्डेन्स
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १४२८०) की फोटो–नकलसे।