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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२४४

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२१२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय लिए इतना अधिक समय देना पड़ता है कि कुछ और लिख सकनेके लिए मेरे पास बिलकुल वक्त नहीं रहता । प्रो० एस० राधाकृष्णन ४९ - आई० सी० हरीश मुकर्जी रोड - भवानीपुर कलकत्ता अंग्रेजी (एस० एन० १३१६६) की फोटो नकलसे । २३०. पत्र : जे० बी० पेनिंगटनको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती ६ अप्रैल, १९२८ प्रिय मित्र, आपके दो पत्र मिले; मैं इनके लिए आपको धन्यवाद देता हूँ । मैं इतना व्यस्त रहा हूँ कि आपकी पुस्तक समाप्त नहीं कर सका हूँ । यदि आप समझते हैं कि 'यंग इंडिया' में प्रकाशित मेरे लेखों और कु· मेयोकी पुस्तकमें कोई अन्तर नहीं है, तो जहाँ तक कु० मेयोके कार्यका सम्बन्ध है, मेरे लिये कोई और दलील पेश करना बाकी नहीं बचा है। यदि आपके भारतके अनुभव कु० मेयोके अनुभवोंसे मिलते-जुलते हैं, तो सम्भवतः किसी भी दलीलसे आपको उसके विपरीत विश्वास नहीं हो सकता । जे० बी० पेनिंगटन महोदय ५. एवेल पार्क गार्डेन्स एवेल, सरे अंग्रेजी (एस० एन० १४२८०) की फोटो नकलसे । हृदयसे आपका, Gandhi Heritage Portal