२३४. पत्र : आई० पी० दुराईरत्नम्को आश्रम प्रिय मित्र, साबरमती ७ अप्रैल १९२८ आपका पत्र मिला। मैं ' विद्यार्थी कांग्रेस' की सब तरहसे सफलताकी कामना करता हूँ । मुझे आशा है कि विद्यार्थी अपनी मातृभूमिके लाखों भूखे रहनेवाले लोगोंको नहीं भूलेंगे। उनकी सहायता करनेका सबसे ज्यादा कारगर तरीका यह है कि वे खादीको अपनाकर उनके साथ अपनी एकात्मता स्थापित करें। श्रीयुत आई० पी० दुराईरत्नम् सचिव, विद्यार्थी कांग्रेस, चावकचेरी, लंका अंग्रेजी (एस० एन० १३१७२ ) की माइक्रोफिल्मसे । २३५. पत्र : रैहाना तैयबजीको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती ७ अप्रैल, १९२८ प्रिय रैहाना, कतई पत्र न लिखनेसे बोलकर पत्र लिखवा देना अच्छा है। सुहेलाको मेरी ओरसे बधाई । बच्चेके दोनों गालोंपर, उसके होठोंपर, माथेपर और सिर में बहुत- बहुत चुम्बन । काश मेरे पास तुम्हारे और गीत सुननेका समय होता । कुमारी रैहाना तैयबजी कैम्प, बड़ौदा अंग्रेजी (एस० एन० १३१६९ ) की फोटो - नकलसे । हृदयसे तुम्हारा Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२४७
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