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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२५७

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पत्र : मणिलाल गांधी और सुशीला गांधीको २२५ मेरे यूरोप जानेकी बात चल रही है पर मेरा मन कोई पक्का निश्चय नहीं कर सका है। एक सप्ताहके अन्दर फैसला हो जायेगा । [पुनश्चः] बापूके आशीर्वाद भाई प्रागजीसे कहना कि उनका पत्र मिल गया है। उन्हें अलगसे पत्र लिखनेका समय नहीं है । ऐसा लगता है कि दोनोंके मामलोंका फैसला हो गया है। गुजराती (जी० एन० ४७२२) की फोटो - नकलसे । २४९. पत्र : मणिलाल गांधी और सुशीला गांधीको चि० मणिलाल और सुशीला, सत्याग्रह आश्रम साबरमती १० अप्रैल, १९२८ आज मुझे स्वयं लिखनेका वक्त नहीं है। राष्ट्रीय सप्ताह चल रहा है, इसलिए शरीर जिस हदतक सह सके और जिस हदतक समय बच सके उस हदतक उसका उपयोग कताई में करना चाहता हूँ । इसलिए यह पत्र बोलकर लिखवा रहा हूँ । इस समय तक तो तुम फीनिक्समें स्थिर हो चुके होगे। मुझे तो यह ठीक ही लगता है । अपनी पढ़ाईके लिए सुशीला दो-तीन बार शहर चली जाये । इतना काफी होना चाहिए । अन्ततः भाषाका ज्ञान और दूसरा ज्ञान भी अपने प्रयत्नसे ही मिल सकता है । अबतक तो सुशीलाका स्वास्थ्य बिलकुल ठीक हो गया होगा । कल वेन मुझे मिल गया था । मणिलालसे हुई मुलाकातकी भी थोड़ी चर्चा हुई। मैंने उसके साथ किसी खास विषयपर तो बात नहीं की; परन्तु वह यहाँसे कुछ अच्छे विचार लेकर गया है, ऐसा मुझे लगा । रामदास काठियावाड़ में खादीकी फेरी कर रहा है। नीमू यहीं है । देवदास । दिल्लीके जामिया मिलियामें कताई वगैरा सिखा रहा है । इस समय आश्रममें चरखा निरन्तर चल रहा है। किशोरलाल बहुत बीमार पड़ गया था, पर खबर है कि सामान्य उपचारसे ठीक हो गया है। तुम्हें तो वहाँसे पत्र प्राप्त होते ही होंगे, इसलिए उनके विषयमें कुछ नहीं लिख रहा हूँ । 'गीता' का कुछ अध्ययन कर पाते हो न ? गुजराती (जी० एन० ४७३५) की फोटो - नकलसे । बापूके आशीर्वाद ३६-१५ Gandhi Heritage Portal