२५२. पत्र : आर० आर० एथनको आश्रम साबरमती प्रिय मित्र, ११ अप्रैल, १९२८ आपका पत्र मिला । खेद है कि मैं आपको कोई उपयोगी निर्देश नहीं दे सकता । मैं आपके संगठनको अच्छी तरहसे समझ नहीं सका हूँ । परन्तु यदि आप अहमदाबाद आनेके लिए उत्सुक हैं, तो मैं अगले सप्ताह सोमवारके अलावा किसी भी दिन शामके ४ बजे आपसे मिल सकूंगा । श्री आर० आर० एथन प्रधान सचिव इंटरनेशनल पीस कॅम्पेन १५०, वाट्सन होटल बम्बई अंग्रेजी (एस० एन० १३१८५) की फोटो नकलसे । २५३. पत्र : सदाशिव रावको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती प्रिय सदाशिव राव, ११ अप्रैल, १९२८ मुझे आपके तीन पत्र मिले। जिन मामलोंका आपने जिक्र किया है, उनमें जितनी मदद मैं देना चाहता हूँ, उतनी दे पानेकी क्षमता मुझमें नहीं है । यद्यपि मैं बहुत-से पैसेवाले मित्रोंको जानता हूँ, परन्तु आपने उनपर जिस तरह दबाव डालनेका सुझाव दिया है, उस तरह शायद मैं अपने असरका इस्तेमाल न करूँ । इसलिए आपको अपनी नाव स्वयं खेनी है और बहादुरीसे कठिनाइयोंका सामना करना है । यदि आप आश्रय-विहीन भी हो जायें तो इससे क्या होता है ? क्या लाखों लोग ऐसी ही दशामें नहीं रहते ? और आपकी लड़कियोंको ऐसा प्रशिक्षण मिला है कि यदि आपने उनके लिए कोई प्रबन्ध न भी किया हो, तो भी वे अपने आपको योग्य Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२५९
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