२२८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय ही सिद्ध करेंगी। इसलिए मैं चाहता हूँ कि आपपर जो संकट आ पड़ा है, इसमें मर्दकी तरह अपने कर्त्तव्यका पालन करें। अंग्रेजी (एस० एन० १३१८४) की माइक्रोफिल्मसे । २५४. पत्र : सी० एफ० एन्ड्रयूजको हृदयसे आपका, आश्रम प्रिय चार्ली, साबरमती ११ अप्रैल, १९२८ तुम्हारा पत्र मिला । बड़े दुःखकी बात है कि गुरुदेव बहुत बीमार हो गये हैं और उन्हें रक्तचापका रोग लग गया है । भारतमें यक्ष्माका रोग बड़ा कठिन है। यदि पारजम्बु रश्मि (अल्ट्रा वायलेट रेज़) के सिद्धान्तमें कोई सचाई है --जैसा कि मैं समझता हूँ -- तो भारतमें किसीको भी इस भयंकर रोगसे पीड़ित नहीं होना चाहिए। तुम्हें श्रद्धानन्द लेखमाला समाप्त करनेकी याद बनी होगी । मैं अभी अम्बालालसे नहीं मिला हूँ, परन्तु अपने बीच जो बातचीत हुई थी उसे नहीं भूला हूँ । सी० एफ० एन्ड्रयूज शान्तिनिकेतन अंग्रेजी (एस० एन० १३१५२) की फोटो नकलसे । २५५. एक समयानुकूल किताब 'यंग इंडिया' के पाठक श्री रिचर्ड बी० ग्रेगके नामसे भली-भाँति परिचित हैं । अमेरिकाके ये वकील महोदय खादीके सन्देशसे आकृष्ट होकर कोई दो वर्ष पहले हिन्दुस्तान आये और आने के बादसे ही उन्होंने खादी आन्दोलनका बहुत बारीकीसे अध्ययन किया । कोई साल मरकी मेहनतसे उन्होंने खादी आन्दोलन पर एक किताव तैयार की है, जिसमें खादी पर प्रायः बिलकुल मौलिक ढंगसे विचार किया गया है। अपनी हरएक बातके समर्थनमें उन्होंने आँकड़े और तथ्य प्रस्तुत किये हैं और पाद-टिप्पणियों में श्री ग्रेगने उन प्रमाणोंका हवाला दिया है, जिनके आधारपर उन्होंने अपने निष्कर्ष Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२६०
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