दक्षिण आफ्रिकी भारतीय २३३ बल्कि मेरी मार्फत बरहामपुरके लोगोंको दिया गया था। मैं समझ नहीं सकता कि न्यासियोंके पास अपने इस कामकी क्या कैफियत या बचाव देनेको है । यह तो बेशक अछूतोंके सत्याग्रह करनेका स्पष्ट मामला है। अगर उनका मन्दिर प्रवेश सचमुच ही मना हो तो, मैं आशा करता हूँ कि बरहामपुरकी जनता इस निषेधको हटाकर अपने सम्मानकी रक्षा करेगी । माजोरका मानवीय कताई यन्त्र निम्न दिलचस्प अखबारी कतरन' भेजने के लिए मैं कोयम्बटूरके श्रीयुत सी ० बालाजी रावका कृतज्ञ हूँ : [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १२-४-१९२८ २५८. दक्षिण आफ्रिकी भारतीय अफ्रिकाके गृहमन्त्रीकी ओरसे २४ फरवरी भारतीय कांग्रेसके मन्त्रीके नाम भेजे गये निम्न पत्र में संघ- सरकारकी दी हुई रियायतें लिखी गई हैं : १९२८, को दक्षिण आफ्रिकी कथित जाली प्रवेशोंके सम्बन्ध में यदि पत्नियों और बच्चोंके सम्बन्धमें पत्रकी धारा (ग) में दी गई शर्त अत्यन्त कठोरतापूर्वक लागू न की जायेगी तो यह रियायत ठीक काम देगी । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १२-४-१९२८ १. यहाँ नहीं दी जा रही है। २. यहाँ नहीं दिया जा रहा है। कि वह संघ 'आरेंज चुका था, तो कुछ शर्ते ३. रिवायतों का सार यह था कि यदि कोई भारतीय यह विश्वास दिला देगा फ्री स्टेट' के अतिरिक्त अन्य किसी प्रान्तमें ५ जुलाई, १९२४ के पूर्व प्रवेश कर पूरी कर देनेपर संघ सरकार १९१३ के कानून २२के खण्ड १० को, १९२७ के कानून ३७ के खण्ड ५ द्वारा संशोधित रूपमें पूरी तरह अमलमें नहीं लायेगी । ४. शर्त यह थी कि जो पत्नि और बच्चे ५ जुलाई, १९२७ से पहले ही दक्षिण आफ्रिकी संघमें नहीं लाये गये थे, उन्हें नहीं आने दिया जायेगा । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२६५
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