भाईश्री देवचन्द भाई, २६०. पत्र : देवचन्द पारेखको गुरुवार [१२ अप्रैल, १९२८ ] मैंने काठियावाड़का खादी कार्य और उससे सम्बन्धित सारा सामान तथा कर्जका भार अखिल भारतीय चरखा संघको सौंप देनेका निश्चय किया है । अपने सिर अलगसे जिम्मेदारी लेनेका अर्थ है कि पैसेकी जवाबदारीकी चिन्ता मुझे करनी होगी। मुझे लगता है कि इस समय इसके सम्बन्ध में बाकायदा प्रस्ताव पास कर लेना चाहिए । इसलिए इस आशयका प्रस्ताव समितिमें रखकर पास कर लें या परिपत्र द्वारा सबकी सम्मति ले लें । ऐसा लगता है कि भाई रेवाशंकर अनूपचन्द मनसुखलालका घर अपने कर्जके एवज में ले लेना चाहते हैं । इस सम्बन्ध में आपको कुछ मालूम हो तो लिखें। भाई वालजीका कहना है कि यह घर रेवाशंकर नहीं ले सकते, ऐसा आपका विचार है। मोरबीकी अन्त्यज शालाका क्या हुआ ? गुजराती (जी० एन० ५७२९) से । बापूके वन्देमातरम् २६१. भाषण : खादी विद्यालयके विद्यार्थियोंके समक्ष [ १३ अप्रैल, १९२८ से पूर्व ] खादी सेवा संघकी कल्पना मेरी है। मुझे लगा था कि जिस तरह सरकार यानी नौकरशाही' का मण्डल है, वैसा हमारा भी कोई सेवक मण्डल हो तो अच्छा हो । सरकारके नौकर-मण्डलको तो 'शाही' कहा है क्योंकि उसके सदस्य नौकर होते हुए भी शाही ढंगसे चलते है। किन्तु हम 'शाही' नहीं है क्योंकि हमें तो सच्ची सेवा करनी है । इस मण्डलमें दाखिल होनेके लिए नियत अवधिका पाठ्यक्रम रखा गया, क्योंकि खादी सेवक बननेके लिए शिक्षण और योग्यता चाहिए। खादी शास्त्र अतिशय गम्भीर और वैसा ही अत्यन्त विस्तृत विषय है। क्योंकि इस शास्त्रके द्वारा हम हिन्दुस्तान के ३३ करोड़ आदमियोंकी सेवा करना चाहते हैं और उनकी सेवाके द्वारा जगतकी सेवा १. ढाककी मुहर से । २. खादी सेवा संघमें प्रवेशके लिए चुने गये विद्यार्थियोंके लिए खादी विद्यालय आश्रम में चलाया गया था। ३. साधन-सूत्रके अनुसार यह भाषण राष्ट्रीय सप्ताह ६ और १३ अप्रैल के बीच दिया गया था। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२६७
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