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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२७०

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२३८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय इनको ऊंचे वेतन देनेसे कैसे चलेगा ? सात लाख गो-सेवकों या चर्म-विद्या-विशारदोंकी जरूरत देशको शायद न पड़े, किन्तु खादीके लिए तो इतनेसे कममें चलेगा ही नहीं । इस सेवाका इतना महत्व है, इतने विस्तार और प्रमाणमें इसकी आवश्यकता है । नीरस लगनेपर भी इसके जैसा सरस काम शायद ही कोई दूसरा हो । इस कार्यमें तुम खूब रस लेने लगो तो अपने आपको सुशोभित करोगे, आश्रमको सुशोभित करोगे और देशको सुशोभित करोगे । हिन्दी नवजीवन, १९-४-१९२८ २६२. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको आश्रम साबरमती १३ अप्रैल, १९२८ प्रिय सतीश बाबू, आप देखेंगे कि मैंने खादीका पक्ष मजबूत बनाये रखनेके लिए आपके पत्रका कैसा इस्तेमाल किया है। आप आजकल जो यात्रा कर रहे हैं; मैं आपसे उसका विवरण प्राप्त करनेके लिए उत्सुक हूँ; विशेषकर इसलिए कि मैं जानना चाहता हूँ कि इसका आपकी सेहत पर कैसा असर पड़ रहा है। अंग्रेजी (जी० एन० १५८८ ) की फोटो - नकलसे । हृदयसे आपका, मो० क० गांधी २६३. पत्र : ए० एलिंग्सको आश्रम साबरमती प्रिय मित्र, १३ अप्रैल, १९२८ आपका सौहार्दपूर्ण पत्र मिला । यूरोपसे मिले निमन्त्रणोंको स्वीकार करना चाहिए या नहीं, इसका निर्णय कर पानेका अभी मैं साहस नहीं कर पाया हूँ । इसलिए इसके पहले कि मैं निर्णय करूँ यूरोपसे एक अपेक्षित पत्रकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ। और चूंकि ऐसी स्थिति है, मैं समझता हूँ आप मुझसे किसी वक्तव्यकी १. देखिए “ खादीका स्थान", १२-४-१९२८ । Gandhi Heritage Portal