सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२७२

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

२६५. पत्र : म्यूरियल लेस्टरको आश्रम साबरमती १३ अप्रैल, १९२८ आपका दूसरा समुद्री तार मिला । ऐसा क्यों न हो, आखिरकार आप अमीर देशकी हैं। चूंकि मैं गरीब देशका हूँ, इसलिए कोई भी समुद्री तार भेजनेसे पहले पचास बार सोचता हूँ और हर बार मैं अपने आपसे कहता हूँ कि एक रुपयेका अर्थ है ६४ भूखे लोगोंको प्रतिदिन एक घंटे काम देकर भोजन खिलाना; रुपयेके चौंसठवें भागसे काफी आटा खरीदा जा सकता है और उससे लाखों भूखे लोगों में से एकको एक बारका खाना दिया जा सकता है। इसलिए हम जब भी मिलेंगे, यदि कभी मिले, मैं आपसे उस सारे पैसेका हिसाब देनेके लिए कहूँगा जो आप इन समुद्री तारोंपर, पॉपलरके गरीब लोगोंका प्रतिनिधित्व करनेके बावजूद खर्च करती रही हैं । मैं यूरोप जाने अथवा न जानेका पक्का निश्चय करने योग्य काफी हिम्मत नहीं बटोर पा रहा हूँ । इसलिए मैं रोमाँ रोलाँके अपेक्षित पत्रको प्रतीक्षा कर रहा हूँ । अपेक्षित पत्र मुझे अन्तिम रूपसे निश्चय करनेके लिए बाध्य कर देगा । मेरी समझमें नहीं आता कि आपका जोश दिलानेवाला पत्र पाकर भी यूरोपीय यात्राके सम्बन्ध में निश्चय कर सकने में मुझे कठिनाई क्यों हो रही है ? कु० म्यूरियल लेस्टर अंग्रेजी (एस० एन० १४९५५) की फोटो नकलसे । २६६. पत्र : टी० नागेश रावको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती प्रिय मित्र, १३ अप्रैल, १९२८ आपका पत्र मिला । मुझे खेद है कि मैं इससे पहले उसका जवाब नहीं दे सका। मैं आपको केवल यही सलाह दे सकता हूँ कि आप अपनी पत्नीसे बिलकुल अलग रहें। स्वच्छ, अनुत्तेजक भोजन करें। पूरे २४ घंटे ताजी हवामें रहें; जितनी देर आप जागते रहें अच्छे कामोंमें व्यस्त रहें और जब शरीर थक जाये, तो अच्छे Gandhi Heritage Portal