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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२७३

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पत्र : एस० रामनाथन्को २४१ अध्ययन और चिन्तनमें लीन रहें। जबतक आप अपनेको वशमें नहीं कर लेंगे, अपने शिष्योंपर कोई प्रभाव नहीं डाल सकेंगे । श्रीयुत टी० नागेश राव अध्यापक, बोर्ड हाईस्कूल पुट्टूर, द० कनारा अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू० ९२०५ ) से । सौजन्य : टी० नागेश राव २६७. पत्र : एस० रामनाथन्को हृदयसे आपका, मो० क० गांधी आश्रम साबरमती १३ अप्रैल, १९२८ प्रिय रामनाथन्, मुझे मजबूरन एक लम्बा पत्र आपको भेजना पड़ रहा है । 'ने अपने पत्रके साथ पत्र-व्यवहारकी जो प्रतियाँ नत्थी की हैं, उनसे मुझे लगता है कि उनकी बेईमानीका अकाट्य प्रमाण आपके पास है। इससे पहले कि उन्हें अन्तिम उत्तर भेजूं, मैं जानना चाहूँगा कि क्या कोई ऐसा लिखित या छपा हुआ करार है, जिस पर . . .'ने हस्ताक्षर किये हैं । और यदि उन्होंने हस्ताक्षर किये हैं, तो क्या उसमें ऐसी कोई धारा है जिसके बलपर जमानत अपने आप जब्त हो जाये ? यदि जमानतकी जब्तीके बारेमें ऐसा कोई लिखित करार नहीं है तो क्या न्यायालयके हस्तक्षेपके बिना आपकी जमानतको जब्त करार देना उचित है ? अंग्रेजी (एस० एन० १३५९३) की माइक्रोफिल्मसे । हृदयसे आपका, १ और ३. नाम यहाँ नहीं दिया जा रहा है । २. देखिए अगला शीर्षक । ३६-१६ Gandhi Heritage Portal