२६८. एक पत्र' आश्रम साबरमती प्रिय मित्र, १३ अप्रैल, १९२८ आपका पत्र मिला । आपको मालूम होना चाहिए कि संघका प्रशासन अब मेरे हाथ में नहीं है। सेठ जमनालाल बजाज प्रशासकीय प्रमुख हैं, फिर भी मैं आपके मामलेमें दिलचस्पी ले रहा हूँ और मैंने श्रीयुत रामनाथन्को लिखा है । जैसे ही उनका उत्तर आयेगा, मैं आपको फिर लिखूँगा । इस बीच मैं आपको यह बता दूँ कि आपने जो कागजात भेजे हैं, उन्हें देखनेसे मुझे आपके खिलाफ बड़ा मजबूत मामला बनता लगता है। यदि श्रीयुत रामनाथन्के पास रिश्वत और भ्रष्टाचारका निश्चित प्रमाण हो तो, मेरी समझ में नहीं आता कि आप अपना बचाव किस तरह कर सकेंगे । अंग्रेजी (एस० एन० १३५९२) की माइक्रोफिल्मसे । २६९. पत्र : मु० अ० अन्सारीको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती १४ अप्रैल, १९२८ प्रिय डा० अन्सारी, आपका पत्र मिला । यदि मिल-मालिकोंके प्रतिनिधियोंकी सभा होनेकी बात तय हो जाये और यदि आप मुझे समयसे उसकी सूचना दें तो मैं उपस्थित रहूँगा । परन्तु अबतक मोतीलालजीकी ओरसे कोई सूचना नहीं मिली है । मैं मिल-मालिकोंके प्रतिनिधियोंसे लगातार सम्पर्क बनाये हुए हूँ, और जहाँतक मुझे मालूम है, इन बातचीतोंसे कुछ नहीं निकलनेवाला है। मिल मालिकोंने अपना १. जिसको पत्र लिखा गया उसका नाम यहाँ नहीं दिया जा रहा है; देखिए पिछला शीर्षक । २. अखिल भारतीय चरखा संघ । ३. देखिए पिछला शीर्षक । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२७४
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