पत्र : विट्ठलदास जेराजाणीको २४३ एक अलग संगठन बनानेका निर्णय किया है, जिसमें से वे राजनीतिको पूरी तरह बाहर रखना चाहते हैं । सर पुरुषोत्तदासने इस संगठनका अध्यक्ष बननेसे भी इनकार कर दिया है। मुझे मालूम हुआ है कि वह इस निर्णयपर पहुँचे हैं कि फिलहाल मिल- मालिक कुछ भी ठोस काम नहीं करेंगे। श्री बिड़लाने भी मुझे लगभग इसी तरहकी बात लिखी है; यों वे चाहते हैं कि मिल मालिकोंके बगैर भी बहिष्कार आन्दोलन किया जाये। श्री बिड़लासे इतनी बारकी बातचीत और इतना पत्र-व्यवहार करनेके बाद मेरा भी वही मत है । परन्तु इसका यह अभिप्राय नहीं है कि हमें, जो सम्मेलन मोतीलालजी बुलाना सोच रहे हैं, नहीं बुलाना चाहिए । जो हो रहा है उसकी सूचना आप मुझे देते रहियेगा। मैं चाहूँगा कि आप 'यंग इंडिया' के पृष्ठों में मिलोंके बारेमें मैंने जो कुछ लिखा है, उसे पढ़ लें। यदि आपके पास वे लेख न हों तो मैं वे लेख आपके पास भेज सकता हूँ । मैं चाहता हूँ कि आप अविलम्ब जामियाके संविधानको निश्चित रूप दे दें । डा० मु० अ० अन्सारी अहमदाबाद पैलेस, भोपाल अंग्रेजी (एस० एन० १३१९१ ) की फोटो नकलसे । २७०. पत्र : विट्ठलदास जेराजाणीको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती भाईश्री विट्ठलदास, १४ अप्रैल, १९२८ यह तुम्हारे पत्रके जवाबमें है । यदि बहिष्कार उग्र रूप पकड़ ले तो हमारे पास जितनी चाहिए उतनी खादीकी ओढ़नियाँ और धोतियाँ नहीं हैं । जो खादी ही पहनना चाहते हैं, उन्हें सिर्फ लँगोटी ही क्यों न पहननी पड़े उनका काम तो चल सकता है । किन्तु जो ऐसा करनेके लिए तैयार न हों और दूसरा कोई कपड़ा मिले तो विदेशी वस्त्रके बहिष्कारमें भाग लेनके लिए तैयार हैं, उन्हें हम मिलकी घोतियाँ या साड़ियाँ दें। इसका यह अर्थ हुआ कि मिलें हमारे द्वारा निश्चित कपड़े के सिवा दूसरा कपड़ा न बनायें और उनकी दुकानोंमें दूसरे कपड़े के स्थानपर खादी ही बिके। मैं मानता हूँ कि इस बातको शायद मिलें कबूल न करें, पर जब तक वे कबूल न करें तब तक हमारा उनके साथ समझौता नहीं हो सकता । मेरी माँगका तो यह अर्थ है कि मिलें खादी के महत्वको हमेशा के लिए स्वीकार कर लें । यह बात समझ में न आये तो मुझसे फिर पूछ लेना । मैं यह नहीं चाहता कि वहाँका काम बीचमें Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२७५
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