पत्र : मणिबन पटेलको २४७ शिक्षकोंको अपने निश्चय पर अड़े रहना चाहिए। ढेढ़ भाइयोंपर वे रोष न करें। मगर ढेढ़ बालकोंको रखनेके लिए एक भी भंगी बालकको हटायें नहीं । मंगी बालक जितने भी आयें उन्हें प्रेमपूर्वक पढ़ायें और इसीमें अपने कार्यकी सफलता मानें। उनकी निश्छलता और श्रद्धाका असर ढेढ़ोंपर भी जरूर पड़ेगा और अगर भंगी बालकों में स्वच्छता, सत्य, प्रेम ज्ञान वगैरा देखेंगे तो वे अपने बालकोंको भेजे बिना रह नहीं सकेंगे। अस्पृश्यताका मैल धोनेकी इच्छा रखनेवालेको सबसे पहले उसीका संग्रह करना चाहिए, जिसका सभी कोई त्याग करते हैं। मैं ऐसे सुधारकोंको जानता हूँ जो सोचते हैं कि 'ढेढ़का सुधार करनेके पहले हम अपना सुधार तो कर लें । हम पहले आप सुधर जायेंगे तो ढेढ़ोंको भी सुधारेंगे।' इस विचारधारामें दो दोष हैं, एक तो अधैर्य और दूसरा अज्ञान । अधैर्य इसलिए कि हम कठिनाइयोंका सामना करनेका धैर्य खो बैठते हैं । अज्ञान इसलिए कि हम यह नहीं समझते कि हिन्दू धर्म में जो सबसे बड़ा सुधार करना है, वह तो इस अस्पृश्यताका मैल धोनेका है । दूधमें अगर जहरका स्पर्श भी हो जाये, तो जिस तरह वह बेकार हो जाता है उसी तरह अगर हिन्दू जातिमें अपृश्यताका अंशमात्र भी रहने देते हैं, तो यह जाति बेकार हो जाती है। इस कलंकके धोनेसे दूसरे सुधार रुक नहीं जाते हैं। इस कलंकको रहने देनेपर दूसरे सुधार लगभग बेकार हो जाते हैं । क्षयके रोगीके दो एक फोड़े साफ किये ही तो क्या और न किये, तो भी क्या ? [ गुजरातीसे ] नवजीवन १५-४-१९२८ चि० मणि, २७३. पत्र : मणिबहन पटेलको साबरमती रविवार [१५ अप्रैल, १९२८ ] वहाँ जानेके बादसे तुम्हारा कोई पत्र मुझे नहीं मिला ; यह ठीक नहीं है । तुम्हारा रोजका क्या कार्यक्रम है, सो मुझे लिखो । अपना अनुभव भी लिखकर भेजो। साथकी चिट्ठी पढ़कर बताओ कि क्या तुम लंका' जाना चाहोगी । [ राष्ट्रीय ] सप्ताह तुमने किस तरह मनाया ? [ गुजरातीसे ] बापुना पत्रो : मणिबहेन पटेलने १. साधन- सूत्रसे । २. बारडोली । ३. खादी प्रचारके लिए। बापूके आशीर्वाद Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२७९
दिखावट