प्रिय मीराबाई, २७४. पत्र : सरोजिनी नायडूको १६ अप्रैल, १९२८ मैं सोच रहा था कि आप पद्मजाके बारेमें मुझे लिखेंगी। उससे कहिये कि उसे जल्दी ठीक होना है। नहीं तो वह बहादुर लड़की नहीं मानी जायेगी। अभी और कितनी देर उसके वहाँ रहनेकी उम्मीद है ? आपकी अमेरिकी यात्राका क्या हुआ ? मैं बुजदिल बन गया हूँ। मैं निर्णय ही नहीं कर पा रहा हूँ कि मैं यूरोप जाऊँ या न जाऊं । सस्नेह, श्रीमती सरोजिनी नायडू अंग्रेजी (एस० एन० १३१९२ ) की फोटो - नकलसे । २७५. पत्र : एनी बेसेंटको कतैया साबरमती १६ अप्रैल, १९२८ प्रिय डा० बेसेंट, आपके संक्षिप्त पत्रके लिए धन्यवाद । आपने जिस आन्दोलनके बारेमें लिखा है, शायद मैं उसमें भाग न लूं। मैं ऐसा महसूस करता हूँ कि हम लोग बहुत ज्यादा संस्थाएँ और संगठन बना रहे हैं, परन्तु उन्हें चलानेके लिए पुरुषों और महिलाओंकी संख्या नहीं बढ़ा रहे हैं । अंग्रेजी (एस० एन० १३१९३) की फोटो - नकलसे । हृदयसे आपका, मो० क० गांधी Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२८०
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