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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३६३

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पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको ३३१ आन्दोलनमें अपने आपको लगा दिया है । आप अस्पृश्यता निवारणकी मात्र खूबियाँ गिनकर ही सन्तुष्ट नहीं है वरन् इस बुराईको दूर करनेमें अपनी महान शक्ति लगा रहे हैं और इसलिए मैं यह चाहता हूँ कि आप समाचारपत्रोंमें छपनेवाली उस विरोधी आलोचनाकी प्रतीक्षामें न रुके रहें जो शायद की जायेगी; बल्कि आप उन लोगोंसे, जो विरोधमें उग्र आलोचना करनेवाले हैं, उनके विचार मालूम करें। अलबत्ता यह खादी सम्बन्धी साहित्य, विशेषकर ग्रेगकी किताब दोबारा गम्भीरतासे पढ़नेपर इसमें आपका विश्वास अटल होनेपर ही किया जाये। मैं जानता हूँ कि आप स्वास्थ्यके कारण तूफानी दौरा नहीं कर सकते, परन्तु आप जानते ही हैं कि मैं क्या चाहता हूँ। और वह आप तभी दे सकते हैं जब आपके हृदयमें अटल विश्वास हो जाये । अंग्रेजी (एस० एन० १३२२६) की फोटो - नकलसे । ३७३. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको हृदयसे आपका, आश्रम प्रिय सतीश बाबू, साबरमती १२ मई, १९२८ मुझे खुशी है कि आपने अपनी खुराकका पूरा ब्यौरा लिख भेजा है। मैं यह सोचता हूँ कि आपको बेसन लेना छोड़ देना चाहिए। इसे पचाना आसान नहीं होता, विशेषकर तब जबकि वह तल दिया जाये। मैं समझता हूँ कि आप इसे प्रोटीनके खयालसे लेते हैं । आप अधिक सुपाच्य अन्न, गेहूँकी अच्छी तरह सिकी चपातियोंके या पाव रोटीके रूपमें सेवन क्यों न करें। मुझे लगता है कि आप पर्याप्त मात्रामें दूध नहीं ले रहे हैं । मेरे खयालसे एक कप दूध लगभग आठ औंस हुआ और यदि आप इतना दूध दो बार लेते हैं तो इसका मतलब हुआ कि आप कुल एक पौण्ड दूध लेते हैं । यह जैसा काम आप करते हैं, उसके लिए पर्याप्त नहीं है। आपको कमसे कम दो पौण्ड दूध लेना चाहिए । मुझे नहीं मालूम कि आपको चावलकी जरूरत है या नहीं है। यदि है तो आप अवश्य बड़ी खुशीसे लें । आपकी खुराकमें फलोंकी मात्रा बहुत कम है। कभी- कभी सन्तरा खानेसे ही काम नहीं चलेगा। हमारे लिये सामिष विटामिनकी जितनी आवश्यकता मानी जाती है उतनी ही निरामिष विटामिनकी भी है । और निरामिष विटामिन मुख्यत: ताजे फलों और ताजी सब्जियोंसे ही मिल सकते हैं। बिना पकी सब्जियाँ ताजे फलोंके समान उतनी आसानीसे नहीं पचती और किसी वस्तुको पकाने के साथ ही उसके कुछ न कुछ विटामिन नष्ट हो जाते हैं । Gandhi Heritage Portal