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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३६७

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३७८. प्राथमिक शिक्षा - १ गुजरात विद्यापीठका एक उद्देश्य यह है कि उसका मुख्य काम देहातकी शिक्षाके बारेमें होना चाहिए, और आजकल ज्यादातर देहाती शिक्षाका मतलब प्राथमिक शिक्षा ही होता है । इस विद्यापीठका काम क्लर्क तैयार करना नहीं, बल्कि ग्रामसेवक तैयार करना है । विद्यापीठको अगर शहरके पास रहना है और शहरका रवैया बदला जा सकता हो, तो उसे बदलनेमें हाथ बँटाना उसका काम है। यानी आज शहर जो गाँवोंकी बरबादीपर आबाद होते जा रहे हैं, उसके बजाय गाँवोंकी सेवामें लगें । ऐसा होना सम्भव हो या न हो, फिर भी विद्यापीठको शहरोंमें जितने युवक और युवतियाँ इस खयालके बनाये जा सकते हों, बनाने चाहिए। इसलिए प्राथमिक शिक्षाका विचार अलग-अलग तरहसे किया जाना जरूरी है । इस लेखमें तो मैं एक ही विचारकी छानबीन कर लेना चाहता हूँ । बहुत बरसोंके मनन और कुछ प्रयोगोंके बाद मैं इस नतीजेपर पहुँचा हूँ कि प्राथमिक शिक्षा कमसे कम एक साल बगैर किताबोंके ही दी जानी चाहिए, और उसके बाद भी विद्यार्थियोंमें कमसे कम पुस्तकोंका उपयोग होना चाहिए । बारहखड़ीको सीखते-सीखते और ककहरा रटते रटते बच्चेकी दूसरी इन्द्रियोंका विकास रुक जाता है और उनकी बुद्धि खिलनेके बजाय कुण्ठित हो जाती है । बच्चा पैदा होते ही ज्ञान लेने लगता है, पर ज्यादातर आँखों और कानोंसे । बोलना प्रारम्भ करते ही उसे भाषाकी जानकारी होने लगती है । इसीलिए जैसे माँ-बाप होते हैं, वैसा ही बच्चा हो जाता है। अगर माँ-बाप संस्कारी होते हैं, बच्चा शुद्ध उच्चारण करता है, और घरमें होनेवाले शुद्ध आचरणकी नकल करता है। यही उसकी सच्ची शिक्षा है । और अगर हमारी सभ्यता छिन्न-भिन्न न हो गई होती, तो बच्चे अच्छी से- अच्छी तालीम अपने घरोंमें ही पाते होते । इस वक्त हमारे लिये यह शुभ अवसर नहीं है। बच्चोंको पाठशाला भेजने के सिवा कोई चारा नहीं । परन्तु बच्चा पाठशाला जाये, तो उसे पाठशाला घर जैसी लगनी चाहिए, और शिक्षक माँ-बापकी तरह मालूम होने चाहिए। शिक्षा भी वैसी होनी चाहिए, जैसी एक सभ्य घरमें दी जानी चाहिए। यानी बच्चोंको शुरूका ज्ञान शिक्षकोंकी जबानी मिलना चाहिए। और इस तरह शिक्षा पानेवाला बच्चा कानों और आँखोंके जरिये जितना ज्ञान एक सालमें पाता है, उतने ही असेंमें ककहरेसे मिले हुए ज्ञानसे दस गुना ज्यादा होगा । मामूली इतिहास-भूगोलकी जानकारी बालक हँसी-हँसी में और कहानीके रूपमें पहले सालमें पा लेगा । कितनी ही कविताएँ वह शुद्ध उच्चारणके साथ जबानी याद कर लेगा । अंक उसने अपने आप ही कण्ठस्थ कर लिये होंगे । और बालकपर अक्षर Gandhi Heritage Portal