३३६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय पहचाननेका बोझा न पड़नेके कारण उसका मन मुरझाना बन्द हो जायेगा और उसकी आँखका दुरुपयोग रुक जायेगा । बच्चे के हाथका उपयोग स्लेटपर आड़े-टेढ़े अक्षर लिखने और अक्षरोंके मुश्किल नाम समझाने के बजाय भूमितिकी रेखाएँ खींचने में और चित्र बनाने में होगा। यह हाथकी सच्ची प्राथमिक शिक्षा है । अगर हम गुजरातके और हिन्दुस्तानके करोड़ों बच्चोंको शिक्षा देना चाहते हों, तो प्राथमिक शिक्षा और किसी तरह दी ही नहीं जा सकती । करोड़ों बच्चोंको किताबें दे सकना इस देशके लिए आजकी हालतमें लगभग नामुमकिन चीज है। मैं स्वीकार करता हूँ कि प्राथमिक शिक्षाके लिए अगर बच्चोंको पुस्तकें देना जरूरी ही हो, तो कितना भी खर्च क्यों न हो, पुस्तकें देनेकी कोशिश जरूर होनी चाहिए। लेकिन जब ये किताबें अनावश्यक और नुकसान पहुँचानेवाली समझी जायें, तब इस व्यावहारिक दलीलको काममें लिया जा सकता है। जो चीज नैतिक दृष्टिसे अनावश्यक और नुकसानदेह है, वह व्यावहारिक दृष्टिसे भी न करने लायक है। शुद्ध सभ्यतामें नीति और व्यवहार विरोधी चीजें न हैं, न होनी चाहिए । यह साफ है कि मौजूदा पाठशालाओंके शिक्षकोंके द्वारा ऐसी शिक्षा नहीं दी जा सकती। ये शिक्षकगण मारपीट कर बारहखड़ी भले सिखा दें, शायद कुछ अंक भी सिखा दें । पर जिस साधारण ज्ञान, की मैंने बच्चोंको पहले वर्षमें मिलनेकी कल्पना की है वह तो स्वयं बेचारे शिक्षकको ही नहीं होता। वह खुद ही शुद्ध भाषा बोलना नहीं जानता, तो बच्चे क्या सीखेंगे ? इसका विचार हम दूसरे भागमें करेंगे । [ गुजरातीसे ] नवजीवन, १३-५-१९२८ ३७९. पत्र : पी० वी० कर्मचन्दानीको प्रिय मित्र, आश्रम साबरमती १३ मई, १९२८ आपके कृपा पत्रके लिए धन्यवाद। मैंने रेडियमके इलाजके बारेमें सुना है । आपके पास जो बोतलें हैं उन्हें भेजनेके आपके प्रस्तावके लिए मैं आपको धन्य- वाद देता हूँ । परन्तु मैं आपके इस प्रस्तावका लाभ नहीं उठाऊँगा, क्योंकि दवाई न १. पी० बी० कर्मचन्दानीने गांधीजीको रक्तचापके इलाज के लिए रेडियम क्लोराइडके इलाजकी सलाह दी थी। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३६८
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