पत्र : लॉर्ड इविनको ३३७ खानेके अपने निश्चयके अलावा मुझे वैसे भी यह लगता है कि आजकल मैं रक्तचापसे पीड़ित नहीं हूँ । कैप्टेन पी० वी० कर्मचन्दानी, आई० एम० एस० इंडियन मिलिटरी हास्पिटल पिशिन हृदयसे आपका, बलूचिस्तान अंग्रेजी (एस० एन० १३२२८) की फोटो नकलसे । चि० शान्तिकुमार, ३८०. पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको रविवार, १३ मई, १९२८ तुम्हें बिना मांगे ही आशीर्वाद भेज रहा हूँ । तुम खूब जियो और खूब सेवा करो। सुमतिने तुम्हें वर्षगाँठके दिन क्या भेंट दी है ? क्या वह रोज कातती है ? निरन्तर खादी पहनती है ? निरन्तर दरिद्रनारायणका विचार करती है ? यदि प्रत्येक वर्षगाँठ पर वह तुम्हें ऐसे ही उपहार दे, तो तुम दोनोंका कल्याण हो और दरिद्र- नारायणका बेड़ा भी पार लग जाये । तुम्हारे चेकका उपयोग तुम्हारी इच्छानुसार करूँगा । बापूके आशीर्वाद गुजराती (सी० डब्ल्यू ० ४७०४ ) की फोटो- नकलसे । सौजन्य : शान्तिकुमार मोरारजी ३८१. पत्र : लॉर्ड इविनको साबरमती १६ मई, १९२८ प्रिय मित्र, मेरे दुःखके अवसर पर आपने जो पत्र लिखा है, उसकी मैं हृदयसे कद्र करता । मुझे याद आया कि पिछले साल नडियादमें मगनलाल गांधीसे आपकी भेंट कराई गई थी । परमश्रेष्ठ वाइसराय अंग्रेजी (एस० एन० १३३८६) की फोटो नकलसे । ३६-२२ मैं हूँ, परमश्रेष्ठका विश्वस्त मित्र, मो० क० गांधी Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३६९
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