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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३७२

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३४० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय चाहे, बिना यथोचित जाँचके लगानमें कुछ भी बढ़ती कर सकती है। मैं यह भी कह दूँ कि यह आन्दोलन किसी राजनीतिक उद्देश्यके लिए किया गया लगान बंदीका आन्दोलन नहीं है। यह आन्दोलन एक ऐसी स्पष्ट निर्धारित शिकायत के विरुद्ध है, जिसका एक ताल्लुकेके सभी लोगों पर असर पड़ता है । इसलिए आयुक्तका यह कहना शेखी और झूठकी हद है कि : मुझसे अधिक इस बातके लिए कोई और चिन्तित नहीं है कि गरीब किसानोंको, उनपर जोनेवाले आन्दोलनकारियोंका गिरोह गलत रास्ते ले जाकर उनका सर्वनाश न करा दे। खेड़ा जिलेमें पाँच ताल्लुके हैं जहाँसे ये आन्दोलनकारी आते हैं। बाढ़के कारण वहाँके लगानमें रद्दोबदल दो वर्षोंके लिए मुल्तवी कर दिया गया है । पिछले ७-८ महीनों में सरकारने बाढ़ संकट निवारणके लिए खड़ा जिलेमें कोई ५० लाख तकका तकावी कर्ज दिया है। अगर इन आन्दोलनकारियोंको बारडोलीमें सफलता मिल गई तो खड़ा जिलेमें लगान और तकावीका वसूल होना खतरे में पड़ जायेगा । अगर आन्दोलनकारियोंको सफलता मिली तो खेड़ाका तकावी कर्ज वसूल होना खतरेमें नहीं पड़ेगा। अगर कर्ज लेनेवालोंने उसे लौटानेमें आनाकानी की तो सरकार देखेगी कि आन्दोलनकारियोंके मुखिया वल्लभभाई पटेल उसके अवैतनिक पटवारी बनकर कर्ज वसूल करते फिरेंगे । आन्दोलनकारियोंकी सफलतासे यह अवश्य होगा कि सरकारी अफसरोंको सम्मानित लोक-सेवकोंका अपमान करनेका साहस न होगा, झूठी बातें कहनेकी हिम्मत न होगी, जैसी कि हिम्मत गुजरातके उत्तरी खण्डके आयुक्तने दिखलाई है; और लोग, बारडोलीके बारेमें जिस अत्यन्त अनुचित और अन्यायपूर्ण लगान लगाये जानेकी बात कही जा रही हैं, वैसे लगानसे राहत पा सकेंगे । जनतासे भी एक बात कहनी है । सरकारने अपनी बुद्धिमानीसे, और इस बातपर जोर देनेके लिए कि शासनकी सफलता प्रजामें फूट डालनेपर निर्भर है, बारडोली जैसे हिन्दू बहुल प्रदेशमें मुसलमान अफसरों और पठानोंको ला बुलाया है। बतौर सत्याग्रहीके, लोग चाहें तो सहज ही सरकारको मात दे सकते हैं । वे अफसरों और पठानोंके साथ मित्रताका बरताव करें। वे उनपर न तो अविश्वास करें, न उनसे जरा भी डरें और न उन्हें तकलीफ पहुँचायें। अफसर तो हमारे देशबन्धु हैं और पठान पड़ोसी हैं। शीघ्र ही सरकार अपनी भूल देख लेगी और जान जायेगी कि हिन्दुओंकी इज्जत मुसलमानोंको भी वैसी ही प्यारी है जैसी मुसलमानोंकी हिन्दुओंको बारडोलीवालोंको यह बात कार्यरूपमें व्यक्त कर दिखानेका अवसर मिला है । वे सत्याग्रहके उस नियमकी सफलताको सिद्ध करें जो कि प्रेमका नियम है, जो एक स्वेच्छाचारी आयुक्तके पाषाण हृदयको भी पिघला सकता है । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १७-५-१९२८ Gandhi Heritage Portal