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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३७३

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३८३. दलित वर्ग और बाघात रियासत आखिर गत ५ तारीखको बाघात रियासतके राणा साहबने आर्य प्रतिनिधि सभा, पंजाबकी ओरसे जो शिष्टमण्डल उनसे मिलनेके लिए गया था उससे भेंट की और आर्यसमाज द्वारा शुद्ध किये कोलियोंके यज्ञोपवीत धारण करनेके मामलेमें रियासत के व्यवहारसे पैदा हुई स्थितिपर चर्चा की। इस शिष्ट मण्डलमें राय साहब लाला गंगाराम, पंडित चमूपति, एम० ए०, लुधियानाके दीवान रामशरणदास, पण्डित धर्मवीर वेदालंकार और शिमलाके एडवोकेट लाला शंकरनाथ शामिल थे। शिष्टमण्डलको, भेंटके दौरान जो कुछ हुआ उसके बारेमें निम्नलिखित बयान देनेकी इजाजत मिली है : शिष्टमण्डल के सदस्योंने राणा साहबको सौहार्दपूर्ण अतिथिसत्कारके लिए धन्यवाद दिया और प्रस्तुत प्रश्नके सम्बन्धमें शास्त्रोंकी तथा आर्य प्रतिनिधि सभाकी स्थिति स्पष्ट की। राणा साहबने मण्डलकी बात धैर्यसे सुनी तथा उसे यकीन दिलाया कि उनकी रियासतमें सभी सुस्थापित धार्मिक समाजोंको धर्म प्रचारकी पूरी स्वतन्त्रता है । मण्डलने उनका ज्ञापन शिष्टतासे सुननेके लिए तथा उत्साहवर्धक जवाब देन के लिए राणा साहबको धन्यवाद दिया और उनसे विदा ली। इस संयुक्त बयानमें अत्यधिक सतर्कता तथा राज्यकी भीरुताकी झलक दिखलाई पड़ती है। दलितोंके प्रति किये गये अन्याय तथा एक महान् धार्मिक संस्थाके अपमानको साफ तौरपर स्वीकार करनेसे रियासतकी इज्जत जनताके मनमें बहुत बढ़ जाती। ख़ैर थोड़ा-बहुत जो भी हुआ उसीके लिए धन्यवाद देना चाहिए । अगर राणा साहबकी प्रतिज्ञाका पूर्ण पालन हुआ तो अन्याय और अपमानकी बातको लोग मूल जायेंगे । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १७-५-१९२८ Gandhi Heritage Portal