३८४. मगनलाल गांधी स्मारक अ० भा० च० संघकी कौंसिलने अपनी १२ ता० की बैठकमें यह प्रस्ताव स्वीकार किया है : यह कौंसिल निश्चय करती है कि स्व० श्रीयुत मगनलाल गांधीको स्मृतिमें एक खादी संग्रहालय बनाया जाये। उसके लिए एक लाख रुपयोंकी अपील की जाये । कौंसिल यह निर्णय करेगी कि स्मारक कहाँ बनाया जाये तथा उसकी व्यवस्था किस तरह की जाये । , मेरे पास भारतवर्ष में दूर-दूरसे तथा सुदूर दक्षिण आफ्रिकासे जो संवेदना सन्देश आये हैं, उनसे विदित होता है कि मगनलालका लोगोंके हृदयमें क्या स्थान था। उनके जैसे सज्जन, लोकप्रिय और चुपचाप काम करनेवाले कार्यकर्ताका स्मारक बनाना उचित ही है। खूब सोच विचारके बाद अ० भा० च० संघकी कौंसिलने निश्चय किया कि उनका इससे अच्छा स्मारक कोई दूसरा नहीं हो सकता कि किसी उपयुक्त स्थान पर एक खादी संग्रहालय खोला जाये। संग्रहालय खोलनेकी कल्पना तो मगनलालकी ही थी और उन्होंने अपने स्वभावके अनुसार सत्याग्रह आश्रमके एक कमरे में छोटा-सा संग्रहालय बनाया भी था । किन्तु खादीने जो उन्नति की है, उसे देखते हुए हमें उसके लिए एक स्थायी और बड़े मकानकी और वहाँ वस्तुओंका ऐसा संग्रह करनेकी जरूरत है, जो दिवंगतकी प्रतिष्ठाके अनुरूप हो। ऐसा संग्रहालय एक लाख रुपयोंसे कममें बन ही नहीं सकता। इसलिए संघने कमसे कम एक लाख रुपयोंकी रकम निश्चित की है। गम्भीर अध्ययन और शिक्षणके लिए जो खादी संग्रहालय बनाया जाये, उसके विस्तारकी कोई सीमा नहीं हो सकती । एक लाख रुपयोंसे कौंसिल केवल बहुत मामूली, मगर काफी अच्छी शुरुआत कर सकने तथा स्वर्गीय व्यक्तिकी कल्पनाको स्थायी रूप दे सकने भरकी आशा रखती है। जनता जैसी सहायता दे, उसके अनुसार संग्रहालय में कपासकी खेती पहले जमाने में किस तरह होती थी और आजकल किस तरह होती है, इससे सम्बन्धित तमाम किताबें रखी जा सकती हैं, पुराने जमानेकी तथा आजकलकी अच्छी से अच्छी, महीनसे-महीन तथा मोटी-मोटी खादीके नमूने रखे जा सकते हैं, और धुनकी, ओटनी, चरखे तथा करघेके पुरानेसे-पुराने तथा नए-नए नमूने रखे जा सकते हैं। संग्रहालयके साथ ही थोड़ी जमीन रखी जा सकती है, जिसमें कपासकी खेतीके प्रयोग किये जायें। इन प्रयोगोंमें हमारी दृष्टि कपासकी खेती से गरीब गाँववालोंको लाभ पहुँचानेकी होगी; दुनियाके बाजारसे या शोषण- कुशल धनी व्यापारियोंको लाभ पहुँचानेसे उसका कोई सम्बन्ध नहीं होगा । सत्याग्रह आश्रम में स्वर्गीय मगनलाल ऐसे प्रयोग कर रहे थे। आश्रमकी यह कपास कतैयोंके बीच बहुत प्रिय हो गई है। मिलोंके उपयोगमें आनेवाली कपासको बहुत ज्यादा दबा दिया जाता है जिससे वह कमजोर हो जाती है । घरकी खेतीकी कपासमें इस Gandhi Heritage Portal
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