हैदराबाद राज्यमें खादी ३४३ क्रियाकी जरूरत नहीं होती और उसे सावधानीसे चुना जाता है, अतः उसे धुननेमें कहीं ज्यादा आराम और वक्तकी बचत होती है तथा कतैया मजबूत सूत कात पाता है । अगर दाताओंने उदारता दिखलाई और कौंसिल द्वारा निश्चित इस न्यूनतम रकमसे ज्यादा रकम जमा हो सकी तो प्रस्तावित संग्रहालय में ये सब तथा और कई तरहके काम हो सकते हैं । इस योजनाको अ० भा० च० संघ अमलमें लायेगा, जो दिन दूनी रात चौगुनी बढ़नेवाली संस्था है और जिसमें ऐसे लोग हैं जो ठोस और रचनात्मक कार्य करने के लिए कमर कसे हुए हैं । यह अभी तय नहीं हो पाया है कि संग्रहालय कहाँ बनाया जायेगा, क्योंकि कौंसिलके सामने कई एक स्थानोंके नाम हैं । जैसा कि स्वाभाविक है, साबरमतीका नाम सबसे पहले ध्यानमें आता है । और बाकी चीजोंको ध्यान में रखते हुए यदि साबरमती ही सबसे अधिक उपयुक्त स्थान लगा तो बेशक कौंसिल इस स्थानको ही चुनेगी। कौंसिलकी इच्छा है कि स्वर्गीय मगनलाल भाईकी तरह ही उनके स्मारक संग्रहालय में भी कामकाजकी दृष्टि ही प्रधान हो। इसलिए कौंसिलके सामने स्थानके चुनावमें किसी किस्मकी गलत भावनाका कोई महत्व नहीं होगा । सभी दानोंकी प्राप्ति-स्वीकृति इस पत्रमें छापी जायेगी। दान श्रीयुत शंकरलाल बैंकर, मन्त्री अ० भा० च० संघ, मिर्जापुर, अहमदाबाद या श्रीयुत सेठ जमनालाल बजाज, ३९५ कालबादेवी रोड, बम्बई या व्यवस्थापक सत्याग्रह आश्रम, साबरमतीके नाम मेजे जा सकते हैं । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १७-५-१९२८ ३८५. हैदराबाद राज्यमें खादी यह खुशीकी बात है कि भारतीय राजा राष्ट्रीय अर्थ-व्यवस्थामें खादीका स्थान स्वीकार करने लगे हैं। इस पंक्तिमें सबसे नया आनेवाला राज्य हैदराबाद है । इस राज्यके उद्योग विभागने अभी हालमें अपना एक निरीक्षक सत्याग्रह आश्रममें खादीकी कलाका अध्ययन करनेके लिए भेजा है और उसके साथ विभिन्न प्रक्रिया सीखने के लिए दो युवक भी भेजे हैं। आश्रमका जलवायु और सम्भवतः आश्रमका रहन-सहन उनके अनुकूल नहीं था । इसलिए ये युवक अपने पाठ्यक्रमको समाप्त नहीं कर सके हैं। मुख्य बात यह है कि काम आरम्भ कर दिया गया है। निरीक्षक मौलवी मुहम्मद अलीमें बहुत उत्साह था और ऐसा लगता था कि चरखेके महत्वको उन्होंने अब जितना समझा है उतना पहले कभी नहीं समझा था । मुझे आशा है कि राज्यका उद्योग-विभाग अ० भा० च० संघके तकनीकी विभागसे सम्पर्क बनाये रखेगा और हैदराबादमें मैसूरकी तरह चरखेके कामकी सुनियोजित ढंगसे व्यवस्था करेगा। मैसूरमें उस दिन राज्यके दीवान मिर्जा मुहम्मद इस्माइलने दलित वर्गोंमें खादीका जो कार्य Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३७५
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