३८८. तार : मुहम्मद अलीको [ १९ मई, १९२८ या उसके पश्चात् ] ' आपका तार पाकर प्रसन्नता हुई। आशा है कि महाराजा साहब खादीकी प्रगति की गारंटी लेंगे । अंग्रेजी (एस० एन० १३५९९) की माइक्रोफिल्मसे । ३८९. प्राथमिक शिक्षा - २ गांधी यह एक बड़ा सवाल है कि जिस शिक्षाका हम पिछले अंकमें विचार कर चुके हैं, वह किस तरह दी जा सकती है या उसे देनेके लिए शिक्षक कहाँसे लाये जायें ? शिक्षाके बारेमें यही असली प्रश्न है । सरकारी प्रशिक्षण विद्यालयों (ट्रेनिंग कालेजों) ने इस सवालको हल नहीं किया। जिसे वे 'थ्री आर' यानी लिखना, पढ़ना और गणित कहते हैं, उन्होंने उसको भी हल नहीं किया। इन तीनोंका ज्ञान इतना कम दिया जाता है कि सीखनेवालेको या जनताको उनका बहुत लाभ नहीं मिलता । इसलिए यह काम राष्ट्रीय विद्यापीठको करना है। राष्ट्रीय विद्यापीठका धर्म और अधिकार ही शिक्षाके क्षेत्रमें राष्ट्रकी पोषक नवीन युक्तियाँ ढूंढ़ निकालना है । और मेरी अल्पबुद्धिके अनुसार ये युक्तियाँ यूरोपसे बहुत कम मात्रामें मिलेंगी; हिन्दुस्तानके मौजूदा हालात में उससे भी कम मिलेंगी। हर देशकी शिक्षा उसके स्वराज्यकी रक्षाके लिए होती है। इसलिए हमें अपनी शिक्षामें नये प्रयोग ही करने होंगे। उन्हें करनेमें मले ही हमें यूरोपके अनुभवको जानकारी भी हो जाये; मगर यह मानकर नहीं कि वहाँका सभी कुछ ठीक है, और न यह मानकर कि वहाँके हालातमें जो कुछ वहाँ ठीक है, वही यहाँ भी ठीक है। इससे एक चीज तो यह निकली कि सरकारी स्कूलोंमें जो कुछ होता है, उसे हमें शककी नजरसे देखना है। सरकारी शिक्षाके स्वराज्य और हमारी सभ्यताके लिए घातक होनेके कारण बहुत-से मामलोंमें हम सरकारी तरीके से उलटे चलेंगे तो हमें सीधा रास्ता मिलना सम्भव है। इसकी मिसाल लें : १. यह मुहम्मद अली, उद्योग निरीक्षक, औरंगाबादके १९ मईको मिले उस तारके उत्तरमें भेजा गया जो इस प्रकार था : आपके आशीर्वादसे खादी प्रदर्शनी और कताई प्रदर्शन सफल। महाराजा बहादुरने आपके सूतको चूमा, वे आपको बहुत-बहुत सलाम कहते हैं और कातनेका वायदा करते हैं। आपका आशीर्वाद चाहिए। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३७८
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