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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३८

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६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय इस समितिकी यह राय है कि : १. गुजरातने असह्योगके राष्ट्रीय आन्दोलनके सिलसिले में गुजरात विद्यापीठको कायम करके असहयोग आन्दोलनमें उतार-चढ़ाव आनेपर भी उसे बनाये रखा, इससे राष्ट्रकी उपयोगी सेवा हुई है; २. मगर संख्याके खयालसे देखें तो विद्यापीठमें लगातार कमी ही होती रही है; ३. गुणकी दृष्टिसे भी अगर भीतरी हालत अच्छी होती, तो जितना काम हुआ उससे कहीं ज्यादा हो सकता था; ४. विद्यापीठके जीवन में अब यह नौबत आ गई है कि अब विद्यापीठके इन्तजामको ज्यादा कारगर बनानेके लिए और उसके साथ जुड़े हुए ध्येयोंका ज्यादा एकाग्रतासे पालन करनेके लिए विद्यापीठका तन्त्र एक स्थायी मण्डलको सौंप देनेकी जरूरत है इसलिए; ५. और इस समितिने विद्यापीठकी पुनर्रचनाके बारेमें ४-१२-१९२७ को जो प्रस्ताव पास किया था उसके अनुसार ; यह समिति नीचे लिखे सदस्योंमेंसे उनका, जो इसके साथ जुड़े हुए ध्येयोंको मंजूर करने और उनपर अमल करनेकी प्रतिज्ञा करेंगे, गुजरात विद्यापीठ मण्डल मुकर्रर करती है; और उसे विद्यापीठकी तमाम संस्थाएँ और उसकी तमाम जायदाद, जिम्मेदारियाँ और हक सौंपती है; और इस मण्डलको अपनी संख्या में २५ सदस्य और बढ़ानेकी सत्ता, मौत होनेपर, इस्तीफा मिलनेपर, मण्डलकी प्रतिज्ञा तोड़ने या और किसी प्रबल कारणसे किसी भी सदस्यको मण्डलके बहुमत से अलग करनेपर या और किसी कारणसे जगह खाली होने पर दूसरे सदस्योंको मुकर्रर करने वगैराकी सत्ता और वे सब दूसरे अधिकार, जो इस समितिको हो सकते हैं, देती है। १. श्री वल्लभभाई पटेल २. श्री नृसिंह प्रसाद भट्ट ३. श्री काका कालेलकर ४. श्री शंकरलाल बैंकर ५. श्री महादेव देसाई ६. श्री अब्दुल कादिर बावजीर ७. श्री मणिलाल कोठारी ८. श्री किशोरलाल मशरूवाला ९. श्री नरहरि परीख १. मूलमें यहाँ ' श्रीमती' छपा है । सदस्योंके नाम १०. श्री वालजी देसाई ११. श्री हरिप्रसाद व्रजराय देसाई १२. श्री जुगतराम दवे १३. श्री गोकुलप्रसाद भट्ट १४. श्री सुखलालजी पण्डित १५. श्री परीक्षितलाल मजमूदार १६. श्री गोपालराव कुलकर्णी १७. श्री मामा फड़के १८. . . . मणिबहन वल्लभभाई पटेल Gandhi Heritage Portal