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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३८१

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'दक्षिण आफ्रिकी सत्याग्रहका इतिहास' ३४९ रुपया आपको भेजनेकी आशा रखते हैं। जबतक सब कुछ व्यवस्थित नहीं हो जाता मैं जमनालालजीसे आपको और रुपया पेशगी भेजनेके लिए नहीं कह सकता था । मैं किसी बड़ी संस्थाके पक्षमें बिलकुल नहीं हूँ । डा० अन्सारीने ईदके तुरन्त बाद साबरमती आनेका वायदा किया है। यदि वे आये तो मैं इस सम्बन्धमें उनसे फिर बातचीत करूँगा । डा० जाकिर हुसैन जामिया मिलिया करौल बाग दिल्ली अंग्रेजी (एस० एन० १४९२५) की माइक्रोफिल्मसे । हृदयसे आपका, ३९२. 'दक्षिण आफ्रिकी सत्याग्रहका इतिहास ' मद्रासके साहसी प्रकाशक श्री एस० गणेशन्ने मेरे 'दक्षिण आफ्रिकाके सत्याग्रह के इतिहास' का', यदि इसे इतिहास कहा जा सकता हो तो मूलसे किया गया अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित किया है। यह अनुवाद श्री वालजी गोविन्दजी देसाईने सावधानीसे तैयार किया है। पुस्तक अच्छी छपी है, उसपर खादीकी जिल्द है और उसमें ५११ पृष्ठ हैं । प्रकाशकने यह पुस्तक स्व० मगनलाल गांधीको समर्पित की है, जो कि उचित ही है। पुस्तकमें ५० अध्याय हैं और उसमें एक प्रकार से मेरे दक्षिण आफ्रिकाके आवास-कालका पूरा ब्यौरा आ जाता है। वे अनेक पाठक, जो मेरी 'आत्मकथा ' पढ़ रहे हैं, यदि सत्यके गूढ़ार्थोंको, उनके उस रूपमें जिसमें कि मुझे उनकी प्रतीति हुई है, ठीक-ठीक समझना चाहते हैं तो उन्हें यह पुस्तक अवश्य खरीदनी चाहिए । यह पुस्तक उस अति अद्भुत और अनुपम शक्तिको समझने के लिए भी अनिवार्य है, जिसे मैंने अथवा यह कहना चाहिए कि मगनलाल गांधीने 'सत्याग्रह' कहा था, और दूसरे शब्दोंमें जिसे मैं प्रेमबल, आत्मबल या सत्यबल कहता हूँ और जो 'निष्क्रिय प्रतिरोध' शब्दसे भिन्न अर्थका बोधक था । सत्याग्रहकी कल्पना केवल कमजोर लोगोंके शस्त्र के रूपमें नहीं की गई है । यह प्रबलतम शक्ति है, इससे बड़ी शक्तिकी कल्पना या आकांक्षा सम्भवतः नहीं की जा सकती और यह पशुबलका स्थान भली-भाँति ले सकती है। जो लोग यह समझना चाहते हैं कि सत्याग्रहका प्रयोग सब प्रकारकी कठिनाइयाँ होने पर भी दक्षिण आफ्रिकामें किस प्रकार किया गया था, उनके पास यह पुस्तक होनी चाहिए। पुस्तक इसके प्रकाशक एस० गणेशन, ट्रिप्लीकेन, मद्रास, से साढ़े चार रुपये में मिल सकती है। [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २४-५-१९२८ १. देखिए खण्ड २९ । Gandhi Heritage Portal