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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३८५

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प्रिय सतीश बाबू, ३९६. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २४ मई, १९२८ आपका पत्र मिला । श्री सेनगुप्तको मैंने जो पत्र लिखा है उसकी नकल साथमें भेज रहा हूँ । सहपत्र - १ अंग्रेजी (एस० एन० १३६४० ) की फोटो - नकलसे । प्रिय मित्र, ३९७. पत्र : जे० एम० सेनगुप्तको आपका, २४ मई, १९२८ मेरे सुननेमें आया है कि आप कलकत्ताके आगामी कांग्रेस अधिवेशनके समय एक भव्य प्रदर्शनीका आयोजन करने जा रहे हैं । परन्तु मुझे यह भी बताया गया है कि यह प्रदर्शनी केवल पूरी तरह असली स्वदेशी तक ही सीमित नहीं होगी; अपितु इसमें विदेशी और दूसरी किस्मकी सभी वस्तुएँ प्रदर्शित की जायेंगी। क्या यह सच है ? मैं तो ऐसी आशा कर सकता था कि आप खादीको प्रदर्शनका केन्द्र बनायेंगे और इसके इर्द-गिर्द उन वस्तुओंको प्रदर्शित करेंगे जो शुरूसे आखिर तक पूरी तरह स्वदेशी होंगी और आप न केवल विदेशी वस्त्र और सभी विदेशी चीजोंको ही प्रदर्शनीसे बाहर रखेंगे, अपितु देशी मिलोंके बने कपड़ेको भी बाहर रखेंगे। अहमदाबाद अधिवेशनसे लेकर आज तक कांग्रेस प्रदर्शनियोंका इतिहास ऐसा ही रहा है। पिछले साल मद्रासमें पहली बार इस परिपाटीसे अलग हटकर काम किया गया, जो दुःखद था। मुझे आशा है कि कलकत्तामें यह भूल नहीं दुहराई जायेगी । श्रीयुत सेनगुप्त कलकत्ता अंग्रेजी (एस० एन० १३६०६) की माइक्रोफिल्मसे । १. देखिए अगला शीर्षक । ३६-२३ हृदयसे आपका, मो० क० गांधी Gandhi Heritage Portal