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३९८. पत्र: मुहम्मद हबीबुल्लाको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
२४ मई, १९२८
प्रिय मित्र,
मैं आपके उस पत्रके लिए आपको धन्यवाद देता हूँ, जिसके साथ गुप्त रूपसे मेरी सूचनाके लिए श्रीयुत शास्त्रीके समुद्री-तार[१] की प्रति संलग्न है।
हृदयसे आपका,
सर मुहम्मद हबीबुल्ला
वाइसरायकी कौंसिलके सदस्य
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ ११९८७) की फोटो-नकलसे।
३९९. पत्र: टी॰ प्रकाशम्
२४ मई, १९२८
प्रिय प्रकाशम्,
आपका पत्र मिला। श्री बैंकरने मुझे याद दिलाया है कि जिन दिनों में जुहूमें स्वास्थ्य लाभ कर रहा था, आपको मेरे कहनेपर पैसा दिया गया था। निस्सन्देह आपको यह पैसा खादीके कामके लिए मिला था। परन्तु निश्चय ही आपके ऐसा कहनेका अभिप्राय कहीं यह तो नहीं है कि चूंकि आपको यह पैसा खादीके कामके
- ↑ केपटाउनसे भेजे गये शास्त्रोंके समुद्री तारमें लिखा था: अपनी तार सं॰ २०२ दिनांक २४ अप्रैलके सिलसिले में मुझे ट्रान्सवालको पात्रा रद करनेके लिए बाध्य होना पड़ा है और मैं रियायत योजना के सम्बन्धमें गृह मन्त्री से भेंट करनेके लिए केपटाउन आ गया हूँ। गांधी और पैटिक डंकन १९१४ की जिस तरहकी योजनाका समर्थन करते हैं, उसी जैसी योजनाके लिए मैंने अनुरोध किया है। गृह विभाग, मेरे तार सं॰ २१४ दिनांक २७ अप्रैलमें जिनकी सूचना दी गई है, ऐसे हाल ही के निर्णयों के बावजूद योजनाको कार्यान्वित करनेके लिए उत्सुक है। ट्रान्सवालके भारतीय, विशेषकर गुजराती बड़े उत्तेजित हैं। परन्तु १९१४ को जैसी योजनासे शायद शान्त हो जायें। मन्त्रीने विचार करनेका वायदा किया है परन्तु मुझे शक है। कृपया इसको एक प्रति गांधीको गुप्त रूपसे डाक द्वारा भेज दीजिएगा।