४०३. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २४ मई, १९२८ प्रिय सतीश बाबू, रामविनोद बहुत परेशान कर रहा है। उसने अभी संघ के प्रति अपना दायित्व नहीं निभाया है । क्या आप उसे समझा सकते हैं ? कृष्णदास क्या कर रहा है ? आपका स्वास्थ्य कैसा चल रहा है ? सस्नेह अंग्रेजी (जी० एन० १५९२) की फोटो नकलसे । बापू प्रिय मित्र, ४०४. पत्र : एफ० एच० ब्राउनको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २५ मई, १९२८ मुझे आपका पत्र पाकर बड़ी प्रसन्नता हुई । जब मैं दक्षिण आफ्रिकी शिष्ट- मण्डलके साथ लन्दन गया था; उस समयकी अपनी मुलाकातें मुझे अच्छी तरह याद है । जहाँतक " सत्यके प्रयोग अथवा आत्मकथा " के अंग्रेजी संस्करणकी इजाजतका सम्बन्ध है, पिछले साल न्यूयॉर्ककी मैकमिलन कम्पनीको इसकी इजाजत दे दी गई थी। पुस्तकका दूसरा खण्ड अभी प्रकाशित नहीं होगा । इसे अभी कुछ वक्त लगेगा, क्योंकि मुझे मालूम नहीं है कि भारतीय अनुभवोंसे सम्बन्धित अध्याय कैसे चलेंगे। मैंने अभी उनकी कोई पक्की योजना नहीं बनाई है। इसलिए मैं नहीं कह सकता कि मुझे और कितने अध्याय लिखने पड़ेंगे । यही कारण है कि दूसरे खण्डका प्रकाशन स्थगित कर दिया गया है । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३८९
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