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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३९१

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पत्र: एच० एस० एल० पोलकको ३५९ अनुभव करना चाहिए। यदि उन्हें वकालत छोड़ देनेका पश्चात्ताप हो तो वकालत फिरसे शुरू कर देनी चाहिए । जहाँ तक आपके बच्चोंका सम्बन्ध है -- आप उन्हें जो सच्ची शिक्षा दे सकते हैं वह यह है कि आप उनका इस तरह पालन-पोषण करें कि वे ईमानदार मजदूर बनें । उस शिक्षासे उन्हें और देशको लाभ होगा और आपके बच्चे आपपर बोझ होनेके बजाय अपने लिये और देशके लिए वरदान सिद्ध होंगे । मुझे आशा है कि आपकी पत्नी पूरी तरह ठीक हो गई होगी। मैं यह कह कि आश्रमके संविधानमें आमूल संशोधन हो रहा है और फिलहाल ऐसी इच्छा है कि कमसे कम एक साल तक कोई और आदमी न लिये जायें। इसलिए यदि आपकी पत्नीका अगले एक या दो महीनोंके दौरान आनेका विचार हो तो इससे पहले कि आप उन्हें भेजनेकी बात सोचें, कृपया मुझे लिख दीजिएगा । अंग्रेजी (जी० एन० ५१) की फोटो नकलसे । हृदयसे आपका, मो० क० गांधी ४०६. पत्र : एच० एस० एल० पोलकको आश्रम साबरमती २५ मई, १९२८ आपके पत्र मिले। मैंने महादेवको कहा था कि वे आपको समय-समयपर ठीक समाचार देते रहें और मगनलालकी मृत्युके बारेमें आपको पूरा विवरण दें। मेरे पास ज्यादा कुछ बोलकर लिखवानेका वक्त नहीं है। यह केवल इतना बतानेके लिए है कि मैं आपके तार और पत्रोंकी कितनी कद्र करता हूँ । अब मैं मगनलालके कमरेमें रह रहा हूँ । महादेवने आपको कारण अवश्य बताया होगा । मगनलाल कामपर कलकत्ता गया। उसके बाद वह गया के लिए रवाना हुआ। वहाँसे राधाको मिलने उस स्थान पर गया जहाँ राधा एक परिवारमें परदेकी कुप्रथा खत्म करनेके लिए गई हुई थी । रास्ते में उसे ठण्ड लग गई और निमोनिया हो गया और नौ दिनकी बीमारीके बाद कृपालु मित्रोंके बीच, जिन्होंने उसके लिए मानव द्वारा जो भी सम्भव था किया, शान्तिसे चल बसा । श्री एच० एस० एल० पोलक ४२, ४७ और ४८ डेन्स इन हाउस २६५ स्ट्रैण्ड, लन्दन, डब्ल्यू० सी० २ अंग्रेजी (एस० एन० १४३१६) की फोटो - नकलसे । Gandhi Heritage Portal