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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३९५

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प्राथमिक शिक्षा -- ३ ३६३ क्या महादेवने आपको बताया है कि मैं अब मगनलालके छोटेसे कमरेमें रहने लगा हूँ । इससे मुझे प्रसन्नता होती है और मैं मगनलालकी आत्माके सान्निध्यका अनुभव ज्यादा अच्छी तरह कर पाता हूँ । सस्नेह, अंग्रेजी (एस० एन० १३३९२) की फोटो नकल से । प्रिय मित्र, ४११. पत्र : सेम्युअल आर० पेरीको मोहन [ २६ मई, १९२८ के पश्चात् ] २६ मईके आपके पत्रके लिए धन्यवाद । मुझे याद नहीं पड़ता कि " डज़ सिविलाइजेशन नीड रिलिजन " नामकी पुस्तक मुझे मिली है। मुझे इस बातसे ह हुआ है कि सुदूर पश्चिममें मेरे इतने मित्र और सहानुभूति रखनेवाले लोग हैं । सेम्युअल आर० पेरी हृदयसे आपका, अंग्रेजी (एस० एन० १४०४३) की फोटो नकलसे । ४१२. प्राथमिक शिक्षा -- ३ विनय मन्दिर और महाविद्यालयमें हम शिक्षाका क्रम भली-भाँति बदल दें और शिक्षक मेरे द्वारा पेश किये गये दृष्टिकोणको हज्म कर चुके हों, तभी प्राथमिक शिक्षा यानी देहाती शिक्षाका सवाल हल होगा । आज हम संख्या, लोकलाज या झूठी प्रतिष्ठाके लोभसे कुछ तबदीलियाँ करनेमें हिचकिचाते हैं। अगर न हिचकिचायें तो इन विनय-मन्दिरोंसे गाँवोंकी सेवा करनेवाला सुन्दर वर्ग पैदा हो और शहरोंके पापका कुछ प्रायश्चित्त हो । इन मन्दिरोंमें विद्यार्थी अव्वल दर्जेके घुनिए, कतैये और जुलाहे बनें; पहले दर्जेकी कपासकी खेती जाननेवाले हों; उन्हें देहातके उपयोगकी बढ़ईगिरी आती हो, यानी उन्हें बढ़िया चरखा बनाना आता हो; गाड़ी, हल वगैरा बनाना न आता हो तो भी १. रेनोल्डने बुकरकी लिखी पुस्तक । Gandhi Heritage Portal