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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/३९९

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प्रिय मित्र, ४१५. पत्र : सत्यानन्द बोसको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २७ मई, १९२८ आपने जो सुझाव दिया है वह नया नहीं है। इसपर कई दृष्टिकोणोंसे चर्चा हो चुकी है । परन्तु निजी तौर पर मैंने महसूस किया है कि अभी वह वक्त नहीं आया है कि हम अगुआ बन जायें। इस बीच कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा इस दिशा में अच्छा काम किया जा रहा है। सारे एशियाकी जागृति में योगदान देनेके रूपमें उनके कामका सबसे अधिक महत्व है । हम जैसे जो छोटे लोग हैं, उनके बारेमें, मैं महसूस करता हूँ कि हमें केवल आन्तरिक शक्तियोंका विकास करके अपनी स्थिति सुदृढ़ करनी चाहिए । श्रीयुत सत्यानन्द बोस ७८, धर्मंतल्ला स्ट्रीट, कलकत्ता अंग्रेजी (एस० एन० १३२३१ ) की फोटो नकलसे । प्रिय च० रा०, ४१६. पत्र : च० राजगोपालाचारीको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती २७ मई, १९२८ मैंने आपकी पेंसिल से लिखी टिप्पणियाँ " बिना बिका माल" अभी-अभी पढ़ी है । खादी से सम्बन्धित विचार नितान्त परिचयात्मक हैं । हिन्दू-मुस्लिम एकताके बारेमें विचार पूरी तरह असामयिक हैं और यदि उनके प्रति रोष नहीं भी प्रकट किया गया तो उनका उलटा अर्थ लगाया जा सकता है। इसलिए फिलहाल आप उन्हें तालेके अन्दर ही बन्द करके रखिएगा । अंग्रेजी (एस० एन० १३२३२) की फोटो- नकलसे । हृदयसे आपका, बापू Gandhi Heritage Portal