प्रिय मित्र, ४१८. पत्र : गंगाप्रसादको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २७ मई, १९२८ आपका पत्र मिला। मैंने आपकी पुस्तक पूरी पढ़ी। यद्यपि मैं यह कह सकता हूँ कि आपने इसपर बहुत मेहनत की है, लेकिन आपने मूल स्रोतोंकी प्रामाणिकता प्रस्तुत नहीं की है । परन्तु इस मामलेमें हमारे अधिकतर लेखक दोषी हैं। हम ऐसे ही प्रमाणोंसे आसानीसे सन्तुष्ट हो जाते हैं, जिनसे हमारे पहलेसे ही बन चुके विचारों या सिद्धान्तोंको समर्थन मिलता हो । श्रीयुत गंगाप्रसाद टिहरी अंग्रेजी (एस० एन० १३२३४ ) की माइक्रोफिल्मसे । प्रिय मित्र, ४१९. पत्रः भोजराज खुशीरामको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती २७ मई, १९२८ आपका पत्र मिला । यदि आपका हृदय सचमुच पवित्र है और आपको अपने पिताजीके प्रति और जिस लड़कीसे आपका विवाह हुआ है उसके प्रति सच्चा प्यार है तो आप अपनी पवित्रता और प्यारके बलसे सारा विरोध सहकर मिटा डालेंगे और लड़कीको अपने विचारोंके अनुरूप बना लेंगे । और यदि यह केवल लड़की पसन्द न होनेका मामला है और प्रस्तावित ब्रह्मचर्य केवल सुविधाकी बात है, तो यह आपका स्पष्ट कर्त्तव्य है कि आप लड़कीको अपने मतानुकूल बना लें । श्रीयुत भोजराज खुशीराम मछली बाजार रोहड़ी (सिन्ध ) अंग्रेजी (एस० एन० १३२३५ ) की माइक्रोफिल्मसे । ३६-२४ हृदयसे आपका, Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४०१
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