चि० मणि, ४२०. पत्र : मणिबहन पटेलको [ २८ मई, १९२८] मैंने तुम्हें मूर्ख माना है सो बिना विचारे नहीं, यह तुम सिद्ध कर रही हो । मीराबहन जो कहे वह मेरे लिये कभी वेदवाक्य नहीं हुआ। वह बहन निर्मल है. । तुम यहाँ होती तो तुमसे ही कहता । तुम नहीं थी इसलिए लक्ष्मीदास भाईसे कहा । परन्तु किसी दिन तो मूर्ख न रहकर तुम सयानी बनोगी, यह आशा रखता हूँ । - · [ गुजरातीसे ] बापुना पत्रो : मणिबहेन पटेलने बापूके आशीर्वाद ४२१. हरिलाल देसाईको लिखे पत्रका मसविदा' [ २८ मई, १९२८] प्रिय, अहमदाबादसे एक विशद तार आपको मेरी अनुमतिसे भेजा गया था । मैं उसकी नकल इस पत्रके साथ भेज रहा हूँ, जो अपने हमारे काम और सेवाके तरीके परस्पर विरोधी हैं, भी जिसे अपने सन्तोषका विचार करते हुए मैं अल्पतम हदसे ज्यादा हो । आपमें स्पष्ट है । चूंकि सम्भवतः मुमकिन है कि मेरी ऐसी माँग मानता हूँ आपके विचारमें यदि बढ़े लगानकी अदायगी करनी ही है, तो किसी भी जाँचका क्या लाभ हो सकता है? यदि निर्णय लोगोंके प्रतिकूल हो और बढ़ाये हुए लगानकी अदायगी जल्दी न हो, तो इसकी वसूलीके लिए सरकारने पर्याप्त जमानत ले रखी है। कृपया ध्यान रखिए कि विचारणीय प्रश्नोंके सम्बन्धमें दोनों पक्षोंकी सहमति आवश्यक होगी। ऐसा नहीं हो सकता कि इस सम्बन्धमें सरकार जो तय कर दे वही ठीक मान लिया जाये । १ और २. साधन-सूत्रके अनुसार । ३. मसविदा गांधीजीके स्वाक्षरोंमें है। महादेव देसाई इस पत्रको “दि स्टोरी ऑफ बारडोली " में कुछ शाब्दिक परिवर्तनों सहित उद्धृत करते हुए कहते हैं कि यह पत्र वल्लभभाई पटेल द्वारा भेजा गया था। ४. देखिए "तार : हरिलाल देसाईको ", २५-५-१९२८ के पश्चात् । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४०२
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